बजट के बाद बाजार में दमदार वापसी: सेंसेक्स 950 अंक उछला, निफ्टी 25100 के करीब; तेजी के पीछे 4 बड़ी वजहें
Closing Bell: बजट के बाद गिरावट से उबरते हुए बाजार में जोरदार रिकवरी हुई। सेंसेक्स 950 अंक उछला जबकि निफ्टी भी 25100 के करीब बंद हुआ। वैल्यू बाइंग, सस्ता क्रूड, और मजबूत रुपये के कारण बाजार में तेजी आई।
बजट के दिन आई गिरावट के बाद सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी तेजी आई।
Closing Bell: केंद्रीय बजट 2026-27 के बाद आई तेज गिरावट से उबरते हुए शेयर बाजार ने सोमवार को जोरदार वापसी की। दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद आखिरी घंटों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से करीब 1000 अंक उछल गया और निफ्टी एक बार फिर 25100 के करीब पहुंच गया।
सोमवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रही। रविवार को बजट के लिए हुए स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में बिकवाली का असर सुबह भी दिखा। सुबह 9:15 बजे निफ्टी 29.90 अंक फिसलकर 24796.50 पर खुला जबकि सेंसेक्स 168.61 अंक गिरकर 80555.68 पर आ गया। हालांकि, दोपहर बाद तस्वीर बदली और 3 बजे के आसपास बाजार में तेज खरीदारी शुरू हो गई और सेंसेक्स 943 अंक चढ़कर 81666.46 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स करीब 1 हजार अंक चढ़ा
वहीं निफ्टी 262.95 अंक यानी 1.06 फीसदी चढ़कर 25088.40 पर पहुंच गया। बजट वाले दिन डेरिवेटिव्स पर STT बढ़ाने के ऐलान के बाद 1 फरवरी को बाजार करीब 2 फीसदी टूटा था, जिसके बाद निवेशकों ने अब सस्ते भाव पर खरीदारी की।
निफ्टी 50 में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, अदाणी पोर्ट्स और एशियन पेंट्स करीब 2 फीसदी तक चढ़े। दूसरी ओर, श्रीराम फाइनेंस और मैक्स हेल्थकेयर में 3 फीसदी तक गिरावट रही। बाजार की चौड़ाई हालांकि नकारात्मक रही। जहां 1,282 शेयरों में तेजी और 2,116 में गिरावट दर्ज की गई।
क्यों बाजार में आई तेजी?
1) वैल्यू बाइंग: पिछले सेशन में आए तेज़ करेक्शन के बाद वैल्यू बाइंग देखी गई। 1 फरवरी को, बेंचमार्क इंडेक्स ने बजट-डे ट्रेडिंग सेशन में 6 साल में अपनी सबसे बड़ी परसेंटेज गिरावट दर्ज की थी क्योंकि इन्वेस्टर्स 2026-27 के यूनियन बजट के असर का अंदाज़ा लगा रहे थे।
2) कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: ग्लोबल तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.14 प्रतिशत गिरकर 66.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कम कीमतों से महंगाई का दबाव कम होता है और भारत का ट्रेड बैलेंस बेहतर होता है, जिससे इक्विटी मार्केट को सपोर्ट मिलता है।
3) बजट की घोषणाएं: लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर फोकस करने वाली बजट घोषणाओं से भी इन्वेस्टर सेंटिमेंट को मदद मिली। वित्त मंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उपायों की घोषणा की, ग्लोबल डेटा सेंटर्स के लिए लॉन्ग-टर्म टैक्स इंसेंटिव दिए और एग्रीकल्चर और टूरिज्म के लिए सपोर्ट की रूपरेखा बताई। 2026-27 के लिए 53.5 लाख करोड़ रुपये के यूनियन बजट ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार खर्च के साथ-साथ लगातार फिस्कल कंसोलिडेशन का संकेत दिया।
4) रुपया मजबूत हुआ: सोमवार को, आम बजट 2026-27 पेश होने के एक दिन बाद, रुपया, यूएस डॉलर के मुकाबले 37 पैसे बढ़कर 91.56 पर पहुंच गया, खासकर कच्चे तेल की कीमतों के अपने ऊंचे लेवल से नीचे आने की वजह से। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि रुपये के लिए, बजट ने राहत नहीं, बल्कि भरोसा दिया।
इसके अलावा, सरकार के ज़्यादा उधार लेने के प्लान से इन्वेस्टर्स के सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है। सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी के 4.3 फीसदी पर अनुमानित अपने फिस्कल डेफिसिट को फंड करने के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार ले सकती है।
SBI सिक्योरिटीज की एमडी और सीईओ भुवनेश्वरी ए ने कहा कि बजट ग्रोथ और मैक्रो स्टेबिलिटी के बीच संतुलन बनाता है। 4.3 फीसदी के फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य और कैपेक्स पर जोर से भारत लंबे समय के निवेश के लिए मजबूत गंतव्य बना रहेगा।
(प्रियंका कुमारी)