Gold-Silver ETF: चांदी में बड़ी गिरावट का असर, गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ 24 फीसदी तक गिरे, अभी खरीदें या नहीं?

Gold-Silver ETF Crash: सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट से गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ 10 से 24% तक टूटे। फेड चेयर को लेकर अटकलों और मजबूत डॉलर से दबाव बढ़ा।

Updated On 2026-01-30 16:57:00 IST

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Gold-Silver ETF Crash: सोना और चांदी में रिकॉर्ड तेजी के बाद शुक्रवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली, जिसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर भी पड़ा। कई गोल्ड ईटीएफ 10 से 12 फीसदी तक टूट गए जबकि सिल्वर ईटीएफ में 22 से 24% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। तेज गिरावट के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है क्या यह खरीदारी का मौका है या अभी इंतजार बेहतर रहेगा?

एमसीएक्स पर अप्रैल एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स करीब 9 फीसदी गिरकर 168000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए। इससे एक दिन पहले ही सोना 193096 रुपये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। फरवरी और जून कॉन्ट्रैक्ट भी लगभग 9 फीसदी तक टूटे। वहीं चांदी में और बड़ी गिरावट दिखी। मार्च एक्सपायरी सिल्वर फ्यूचर्स 15% गिरकर 339910 रुपये प्रति किलो पर आ गए जबकि मई और जुलाई कॉन्ट्रैक्ट 12 से 20 फीसदी तक नीचे रहे।

ईटीएफ मार्केट में भी बिकवाली तेज रही। निपॉन इंडिया गोल्ड बीस और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ करीब 10% टूटे। एक्सिल गोल्ड ईटीएफ में करीब 12 फीसदी की गिरावट आई। यूटीआई, एचडीएफसी, डीएसपी, क्वांटम और एडिलवीस जैसे गोल्ड ईटीएफ भी दबाव में रहे। सिल्वर ईटीएफ में गिरावट और ज्यादा रही। एक्सिस सिल्वर ईटीएफ 24 फीसदी, आईसीसीआईसीआई प्रू़डेंशियल और कोटक सिल्वर ईटीएफ करीब 23% जबकि एसबीआई और निपॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ 22% से ज्यादा टूटे।

कीमती धातुओं में यह गिरावट अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच आई है। माना जा रहा है कि नया चेयरमैन ज्यादा सख्त रुख वाला हो सकता है। इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोना-चांदी में मुनाफावसूली बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक ओवरबॉट स्थिति भी गिरावट की बड़ी वजह बनी।

एक्सपर्ट्स की राय बंटी हुई है। उनका मानना है कि लंबी तेजी के बाद एंट्री टाइम करना जोखिम भरा है। बेहतर है कि निवेशक एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करें। एनालिस्ट का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशक इसे रणनीतिक खरीद का मौका मान सकते हैं लेकिन शॉर्ट टर्म सट्टेबाजी से बचें। कमोडिटी एक्सपर्ट निरपेन्द्र यादव के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितता, सेंट्रल बैंक की खरीद और महंगाई से बचाव के लिहाज से गोल्ड अभी भी पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बना रह सकता है।

(प्रियंका कुमारी)

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