GST on EVs: इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से EV इंडस्ट्री को झटका, बजट से बड़ी राहत की उम्मीद

अभी तैयार इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर पर सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्पेयर पार्ट्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी कंपोनेंट्स पर 18 से 28 प्रतिशत तक जीएसटी देना पड़ता है।

Updated On 2026-01-16 18:33:00 IST

 इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर से EV इंडस्ट्री को झटका

GST on EVs: केंद्रीय बजट से पहले इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री ने सरकार से इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (IDS) को ठीक करने की जोरदार मांग की है। इंडस्ट्री का कहना है कि मौजूदा जीएसटी ढांचा EVs को पेट्रोल-डीजल (ICE) वाहनों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी बना रहा है, जिससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की रफ्तार धीमी हो सकती है।

क्या है समस्या?

फिलहाल तैयार इलेक्ट्रिक कार या स्कूटर पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्पेयर पार्ट्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी कंपोनेंट्स पर 18 से 28 प्रतिशत तक जीएसटी देना पड़ता है। इस टैक्स असमानता की वजह से कंपनियों का इनपुट टैक्स क्रेडिट फंस जाता है और वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ता है।

जेनर्जाइज के सीईओ और को-फाउंडर के मुताबिक, इस इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का सबसे ज्यादा असर घरेलू मैन्युफैक्चरर्स पर पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है और EVs की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आ पा रही।

GST 2.0 से ICE वाहनों को फायदा

GST 2.0 के तहत ICE सेगमेंट के कुछ हिस्सों में टैक्स बदलाव किए गए हैं, जिससे EV और ICE वाहनों के बीच कीमत का अंतर कम हो गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को जल्द नहीं सुधारा गया, तो ICE वाहन फिर से ग्राहकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन सकते हैं। हालांकि, 22 सितंबर 2025 से EV पार्ट्स पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था, जिससे आंशिक राहत मिली है, लेकिन टैक्स असमानता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी टैक्स राहत की मांग

इंडस्ट्री का कहना है कि EV को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ वाहनों पर नहीं, बल्कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, चार्जिंग सर्विस और बैटरी स्वैपिंग पर भी स्पष्ट जीएसटी लाभ मिलना चाहिए। ईवाई इंडिया के पार्टनर सौरभ अग्रवाल के अनुसार, पूरे EV इकोसिस्टम को टैक्स सपोर्ट देना जरूरी है।

2030 लक्ष्य के लिए स्थिर नीति जरूरी

सरकार के 2030 तक 30% EV पैठ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इंडस्ट्री ने लगातार पॉलिसी सपोर्ट, डिमांड इंसेंटिव, R&D और राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी की मांग की है। साथ ही, PLI स्कीम के तहत घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने तक जरूरी बैटरी इनपुट्स पर ड्यूटी छूट जारी रखने पर जोर दिया गया है।

(मंजू कुमारी)

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