अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने देर रात अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया। इसके अनुसार, जो रूसी तेल शुक्रवार तक जहाजों पर लोड हो चुका है, उसे 16 मई 2026 तक खरीदा जा सकेगा।

वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को एक अहम फैसला लेते हुए देशों को समुद्र के रास्ते रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अस्थायी छूट फिर से दे दी है। यह छूट करीब एक महीने के लिए लागू रहेगी। खास बात यह है कि दो दिन पहले ही इस राहत को आगे बढ़ाने से इनकार किया गया था।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने देर रात अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया। इसके अनुसार, जो रूसी तेल शुक्रवार तक जहाजों पर लोड हो चुका है, उसे 16 मई 2026 तक खरीदा जा सकेगा।

भारत ने इस फैसले पर साफ किया है कि वह इससे प्रभावित नहीं होगा और रूस से कच्चे तेल व एलपीजी की खरीद जारी रखेगा। भारत पहले से ही अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपना रहा है।

यह कदम वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है। हाल के समय में अमेरिका-इजरायल और ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई थी। हालांकि इस लाइसेंस में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी लेन-देन को शामिल नहीं किया गया है।

इससे पहले ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए थे कि रूसी और ईरानी तेल पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, जिसकी समय-सीमा समाप्त होने वाली थी। उन्होंने यह भी बताया था कि ईरान को दी गई छूट से करीब 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार में पहुंचा, जिससे आपूर्ति दबाव कम हुआ।

वहीं, रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव के अनुसार, इस तरह की राहत से लगभग 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में उपलब्ध हो सकता है, जो वैश्विक उत्पादन के एक दिन के बराबर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थायी राहत से वैश्विक आपूर्ति में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर होगी, लेकिन पेट्रोलियम कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम है।