इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली ऐतिहासिक शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने असली तेवर में आ गए हैं। ट्रंप ने न केवल ईरान की घेराबंदी तेज करने के संकेत दिए हैं, बल्कि सीधे तौर पर चीन को 'टैरिफ टेरर' की चेतावनी दे डाली है।
ट्रंप प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार या रसद की सप्लाई करेगा, उसे अमेरिकी बाजार में भारी-भरकम टैरिफ का सामना करना होगा। इस कदम ने मिडिल-ईस्ट के संघर्ष को अब एक वैश्विक 'ट्रेड वॉर' की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया है।
इस्लामाबाद वार्ता विफल और ट्रंप का 'प्लान बी' एक्टिव
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दुनिया की सबसे अहम कूटनीतिक वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है। 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि किसी भी साझा जमीन पर नहीं पहुँच सके। जैसे ही जेडी वेंस की टीम खाली हाथ वॉशिंगटन के लिए रवाना हुई, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नई रणनीति का खुलासा कर दिया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लेख साझा करते हुए चीन को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप का मानना है कि ईरान की सैन्य शक्ति के पीछे चीन और रूस जैसे देशों का हाथ है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि अगर चीन ने ईरान को हथियारों की खेप भेजना बंद नहीं किया, तो उसके लिए अमेरिका के साथ व्यापार करना नामुमकिन हो जाएगा।
टैरिफ टेरर: ट्रंप का नया आर्थिक प्रहार
डोनाल्ड ट्रंप ने अपना 'टैरिफ अटैक प्लान' एक्टिव कर दिया है। इसके तहत, ईरान को सैन्य हथियार आपूर्ति करने वाले देशों से अमेरिका जो भी सामान खरीदेगा, उस पर अत्यधिक हाई टैरिफ वसूला जाएगा। जानकारों का मानना है कि यह चीन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि चीन पहले से ही गैस और तेल संकट से जूझ रहा है और ईरान के साथ उसके गहरे व्यापारिक संबंध हैं। ट्रंप का यह 'टैरिफ टेरर' वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त करने की क्षमता रखता है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और नौसैनिक नाकेबंदी का डर
शांति वार्ता फेल होने के बाद अब 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर तनाव चरम पर है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि उनके पास ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी करने का विकल्प मौजूद है। हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है और अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक तेल की कीमतों में आग लग सकती है। ट्रंप का दावा है कि वे ईरान के समुद्री रास्तों की घेराबंदी करके उसे दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग कर देंगे, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
ईरान-चीन-रूस गठजोड़ पर अमेरिका की टेढ़ी नजर
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन और रूस फिलहाल ईरान को सीधे तौर पर हथियार बेचने से बच रहे हैं, लेकिन कई गुप्त रास्तों से हथियारों की खेप तेहरान पहुँच रही है। यूएन के प्रतिबंध खत्म होने के बाद ईरान अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है, जिसे रोकने के लिए ट्रंप अब 'सेकेंडरी सेंक्शन' और 'टैरिफ' का सहारा ले रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि ड्रैगन को आर्थिक रूप से चोट पहुँचाकर ही ईरान की रीढ़ तोड़ी जा सकती है।
युद्ध की आहट और वैश्विक बाजार में बेचैनी
इस्लामाबाद वार्ता की नाकामी के बाद अब यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या अमेरिका-ईरान युद्ध अब भीषण रूप लेने वाला है। एक तरफ ट्रंप ने सीजफायर की उम्मीदों को झटका देते हुए टैरिफ टेरर शुरू कर दिया है, तो दूसरी तरफ चीन और ईरान के रुख में भी कोई नरमी नहीं दिख रही है।
इस कूटनीतिक और आर्थिक खींचतान ने पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी पैदा कर दी है। आने वाले दिन वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।