नई दिल्ली : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध अब अपने 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने केंटकी में एक रैली के दौरान घोषणा की है कि अमेरिका इस जंग को जीत चुका है।
ट्रम्प का दावा है कि जंग के पहले ही घंटे में यह साफ हो गया था कि अमेरिकी सेना आगे है और उसने ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक बर्बाद कर दिया है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक 'मिशन' पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक लड़ाई जारी रहेगी ताकि बार-बार ऐसी स्थिति पैदा न हो।
ईरान की टॉप लीडरशिप लगभग खत्म, फिर भी जंग जारी रखने की रणनीति
युद्ध के पिछले 12 दिनों में ईरान को नेतृत्व के स्तर पर भारी क्षति पहुँची है। सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद अब तक करीब 50 टॉप सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी हमलों में मारे जा चुके हैं। इसके बावजूद ईरान का दावा है कि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सकता है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने एक विशेष 'सर्वाइवल स्ट्रेटजी' बनाई है, जिसके तहत सेना की कमान को 7 छोटे हिस्सों में बांट दिया गया है। इसके अलावा, हर महत्वपूर्ण पद के लिए 4 संभावित उत्तराधिकारी पहले से तय कर दिए गए हैं, ताकि लीडरशिप खत्म होने पर भी सेना का तालमेल न बिगड़े।
अमेरिका ने पहले हफ्ते में ही खर्च किए ₹1 लाख करोड़
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने संसद को युद्ध के बढ़ते आर्थिक दबाव की जानकारी दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान जंग के शुरुआती छह दिनों में ही अमेरिका ने करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च कर दिए हैं।
इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 5 अरब डॉलर, केवल आधुनिक हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति पर खर्च हुआ है। यह खर्च पिछले कई दशकों के किसी भी अमेरिकी सैन्य अभियान की तुलना में कहीं अधिक तीव्र है।
ईरान ने शांति बहाली के लिए रखीं तीन प्रमुख शर्तें
भीषण हमलों और नेतृत्व की कमी के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने युद्ध विराम और शांति के लिए तीन कड़ी शर्तें दुनिया के सामने रखी हैं:-
- कानूनी मान्यता: पहली शर्त यह है कि ईरान के संप्रभु और कानूनी अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए।
- नुकसान की भरपाई: दूसरी शर्त के तहत युद्ध के कारण ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर और जान-माल को हुए भारी नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।
- सुरक्षा की गारंटी: तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि भविष्य में ईरान पर कभी भी हमला न हो, इसके लिए एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए। ईरानी राष्ट्रपति के अनुसार, इन शर्तों को मानना ही युद्ध खत्म करने का एकमात्र रास्ता है।
ईरान में मची तबाही: 19 हजार से ज्यादा नागरिक इमारतें हुई प्रभावित
ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) ने युद्ध से हुई तबाही के दर्दनाक आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में अब तक 19,734 नागरिक इमारतें प्रभावित हुई हैं।
इसमें लगभग 16 हजार घर, 3300 से ज्यादा दुकानें और दफ्तर, 77 अस्पताल और करीब 69 स्कूल शामिल हैं। रेड क्रिसेंट के कई केंद्रों को भी नुकसान पहुँचा है और राहत कार्य के दौरान कई स्वयंसेवक घायल हुए हैं। मलबे से घायलों को निकालने का काम निरंतर जारी है।
पेट्रोल की कीमतें कम करने के लिए अमेरिका खोलेगा अपना 'ऑयल रिजर्व'
जंग के कारण वैश्विक तेल बाजार में मची अफरा-तफरी के बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिकी जनता को बड़ी राहत देने का एलान किया है। ट्रम्प ने कहा कि मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका अपने 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' से तेल जारी करेगा।
हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितनी मात्रा में तेल बाजार में लाया जाएगा, लेकिन यह जरूर कहा कि बाद में इस रिजर्व को फिर से भर दिया जाएगा। ट्रम्प ने दावा किया कि उनकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की नौसेना और वायुसेना अब दुनिया की सबसे ताकतवर अमेरिकी सेना के सामने बेहद कमजोर हो गई है।