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प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद बिन सलमान के बीच हुई बातचीत में ईरान-इजरायल युद्ध के वैश्विक असर और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

Middle East Conflict: ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल की है। शनिवार को पीएम मोदी ने सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर विस्तृत बातचीत की।

इस बातचीत का मुख्य केंद्र क्षेत्र की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और वैश्विक व्यापार के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना रहा।

दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि वर्तमान युद्ध का प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है, जिसे नियंत्रित करना अनिवार्य है।

​समुद्री व्यापार और 'होर्मुज-लाल सागर' की सुरक्षा पर चिंता 
प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ बातचीत में विशेष रूप से लाल सागर और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का जिक्र किया। हाल के दिनों में इन क्षेत्रों में बढ़ते हमलों और तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को संकट में डाल दिया है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए निर्बाध नौवहन आवश्यक है।

भारत का एक बड़ा व्यापार और तेल आयात इन्हीं मार्गों से होता है, इसलिए भारत के लिए इन रास्तों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सऊदी अरब ने भी इस पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए समुद्री सुरक्षा में सहयोग का आश्वासन दिया।

​क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बहाली के लिए सामूहिक प्रयास 
दोनों वैश्विक नेताओं ने ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पैदा हुए मानवीय संकट और क्षेत्रीय अस्थिरता पर गहरी चिंता साझा की। पीएम मोदी ने भारत के उस रुख को दोहराया जिसमें संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की बात कही गई है।

सऊदी अरब, जो मिडिल ईस्ट की राजनीति का एक प्रमुख स्तंभ है, इस समय मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका में है। पीएम मोदी और क्राउन प्रिंस ने माना कि युद्ध के और अधिक विस्तार को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि एक बड़ा वैश्विक आर्थिक संकट न खड़ा हो।

​भारत-सऊदी सामरिक साझेदारी और द्विपक्षीय सहयोग 
सिर्फ युद्ध ही नहीं, बल्कि इस बातचीत में भारत और सऊदी अरब के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी संक्षिप्त बात हुई, जो वर्तमान तनाव के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने सऊदी अरब को भारत का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया और क्राउन प्रिंस ने भारत की वैश्विक भूमिका की सराहना की।

​वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका
ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान पीएम मोदी की यह बातचीत दर्शाती है कि भारत अब केवल एक मूकदर्शक नहीं बल्कि एक सक्रिय शांतिदूत की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले भी भारत ने क्षेत्र के अन्य प्रमुख नेताओं के साथ संपर्क साधा है।

प्रधानमंत्री का यह कदम न केवल भारतीय हितों की रक्षा करने के लिए है, बल्कि दुनिया को यह संदेश देना भी है कि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ी शक्तियों को एकजुट होना होगा। सऊदी अरब के साथ यह संवाद आने वाले दिनों में क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

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