मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच ईरान ने Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है। इस रणनीतिक रास्ते से दुनिया का एक तिहाई तेल व्यापार होता है। ईरान ने पाकिस्तान को अपना करीबी सहयोगी मानते हुए इस रास्ते से गुजरने वाले उसके जहाजों और कार्गो को विशेष छूट और सुरक्षा देने का भरोसा दिया था।
ईरान का मकसद था कि मुश्किल समय में मुस्लिम देशों का एक मजबूत ब्लॉक बने, लेकिन पाकिस्तान ने इस भरोसे का इस्तेमाल अपनी आर्थिक तंगहाली दूर करने के लिए 'शॉर्टकट' के रूप में करना शुरू कर दिया है।
पाकिस्तान की 'बैकडोर' साजिश: बड़े तेल टैंकरों की गुप्त तलाश
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार और उसकी कुछ निजी शिपिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े तेल टैंकरों की तलाश कर रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान इन टैंकरों का इस्तेमाल अपनी जरूरत के लिए नहीं, बल्कि तीसरे पक्ष के तेल को ईरान की मिली छूट का फायदा उठाकर सुरक्षित निकालने के लिए करना चाहता है।
पाकिस्तान की कोशिश है कि वह उन देशों या कंपनियों के तेल को होर्मुज से पार करवाए जिन पर प्रतिबंध या खतरा है, और इसके बदले में मोटा कमीशन वसूले। यह सीधे तौर पर ईरान के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है।
ईरान की पीठ में छुरा घोंपकर अरब देशों को साधने की कोशिश
पाकिस्तान का यह 'डबल गेम' केवल ईरान तक सीमित नहीं है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान एक तरफ ईरान से दोस्ती का दम भर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों को यह ऑफर दे रहा है कि वह उनके तेल की सुरक्षित निकासी में मदद कर सकता है।
पाकिस्तान का यह रवैया ईरान को नागवार गुजर सकता है क्योंकि ईरान ने होर्मुज को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानकर पाबंदियां लगाई हैं। अगर पाकिस्तान ने ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर दूसरों को रास्ता दिया, तो इससे तेहरान और इस्लामाबाद के रिश्तों में बड़ी दरार आ सकती है।
क्या पाकिस्तान की ये पैंतरेबाजी उस पर ही भारी पड़ेगी?
आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान इस समय 'पैसे के लिए कुछ भी' वाले मोड में है। तेल टैंकरों के इस खेल में वह अपनी नौसेना का इस्तेमाल करने की भी योजना बना रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम आग से खेलने जैसा है।
यदि ईरान को पाकिस्तान की इस धोखेबाजी का पुख्ता सबूत मिला, तो वह होर्मुज में पाकिस्तानी जहाजों की एंट्री बैन कर सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान की रही-सही अर्थव्यवस्था भी ध्वस्त हो जाएगी और वह मिडिल ईस्ट के इस महायुद्ध में अलग-थलग पड़ जाएगा।