Trump vs Iran: मध्य पूर्व में तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से वापसी का रास्ता धुंधला नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई 'गंभीर परिणाम' भुगतने की धमकी के बाद, तेहरान ने कूटनीतिक शिष्टाचार को ताक पर रखते हुए सीधा हमला बोला है।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के 'धमकी भरे कूटनीति' के आगे झुकने वाले नहीं हैं। ईरान का मानना है कि ट्रंप का मौजूदा रुख पूरी तरह से इजरायली हितों से प्रेरित है, जो न केवल मध्य पूर्व बल्कि खुद अमेरिका की सुरक्षा के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
'नेतन्याहू का रास्ता अमेरिका के लिए राख का ढेर': ईरान की चेतावनी
ईरानी अधिकारियों ने अपने आधिकारिक बयानों में बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ती नजदीकियों पर कड़ा प्रहार किया है। तेहरान ने कहा, "यदि राष्ट्रपति ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के विनाशकारी नक्शेकदम पर चलते रहे, तो अमेरिका खुद को एक ऐसी आग में पाएगा जिससे निकलना नामुमकिन होगा।
ईरान ने चेतावनी दी है कि इजरायल की युद्धोन्मादी नीतियों का समर्थन करना अमेरिका को 'जलकर राख' कर देगा। ईरान का दावा है कि ट्रंप अमेरिका को एक ऐसे 'जीवंत नर्क' की ओर धकेल रहे हैं, जिसका खामियाजा अमेरिकी जनता को भुगतना पड़ेगा।
ट्रंप की धमकी और 'मैक्सिमम प्रेशर 2.0'गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने अपने परमाणु कार्यक्रम या क्षेत्रीय गतिविधियों को तुरंत नहीं रोका, तो अमेरिका ऐसी कार्रवाई करेगा जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप की इस 'मैक्सिमम प्रेशर' रणनीति के जवाब में ईरान ने कहा है कि वह अब 2016 या 2018 वाला ईरान नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों में ईरान ने अपनी मिसाइल तकनीक और ड्रोन क्षमता को काफी उन्नत किया है। ईरान का कहना है कि ट्रंप की धमकियां केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हैं, जिनका जमीन पर कोई असर नहीं होगा।
क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा और वैश्विक चिंताईरान और अमेरिका के बीच इस तीखी बयानबाजी ने वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके तेल निर्यात या सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला हुआ, तो वह Strait of Hormuz को बंद करने और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
इस टकराव ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य यूरोपीय देशों को भी अलर्ट पर डाल दिया है, जो किसी भी तरह से इस जुबानी जंग को वास्तविक युद्ध में बदलने से रोकना चाहते हैं।










