पाकिस्तान की राजधानी इस्लाबाद में होने वाली दूसरे दौर की महत्वपूर्ण शांति वार्ता खटाई में पड़ गई है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर इस बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका पर 'अत्यधिक मांगों' और 'दोहरा रवैया' अपनाने का आरोप लगाया है।
ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता और उसकी पूर्व शर्तों को नहीं मानता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत का कोई औचित्य नहीं है।
ईरान के इस सख्त रुख के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपना रौद्र रूप दिखाया है। ट्रंप ने सीधी चेतावनी देते हुए कहा, "नो मोर मिस्टर नाइस गाय"।
उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बेहद उचित और निष्पक्ष डील की पेशकश कर रहा था, लेकिन अगर ईरान इसे नहीं मानता है, तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट, हर बांध और हर महत्वपूर्ण पुल को निशाना बनाकर उसे पूरी तरह तबाह कर देगा। ट्रंप ने इसे ईरान के पास 'आखिरी मौका' बताया है।
वार्ता टूटने की एक बड़ी वजह समुद्र में हुई ताज़ा सैन्य कार्रवाई भी मानी जा रही है। अमेरिकी नेवी ने होर्मुज की नाकेबंदी तोड़ रहे एक ईरानी मालवाहक जहाज 'तूस्का' को बीच मझधार में रोककर अपने कब्जे में ले लिया है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी चालक दल ने चेतावनी अनसुनी की, जिसके बाद अमेरिकी युद्धपोत ने जहाज के इंजन रूम पर हमला कर उसे रोक दिया।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा दो सप्ताह का अस्थायी युद्ध विराम इसी बुधवार को समाप्त हो रहा है। वार्ता विफल होने का सीधा मतलब है कि खाड़ी क्षेत्र में दोबारा भीषण बमबारी शुरू हो सकती है।
विशेषज्ञ इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा मान रहे हैं, क्योंकि होर्मुज जलमार्ग बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए भी यह कूटनीतिक संकट की स्थिति है, जो इस क्षेत्र में शांति की उम्मीद लगाए बैठे थे।
ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान वार्ता की मेज पर नहीं आता और होर्मुज की नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तो अमेरिका 'प्लान-डी' के तहत ईरान के पूरे बुनियादी ढांचे को 'डेमोलिश' कर देगा।