ओमान की खाड़ी में स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान का झंडा लगे एक मालवाहक जहाज को कब्जे में लिए जाने के बाद ईरान ने 'जैसे को तैसा' वाली रणनीति अपनाई है। ईरानी सेना (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी जहाजों पर आत्मघाती ड्रोनों से हमला बोल दिया है।
इस कार्रवाई को ईरान के 'बदलापुर' अवतार के रूप में देखा जा रहा है, जिसने मिडिल ईस्ट में एक बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने आधुनिक ड्रोनों के बेड़े का इस्तेमाल कर अमेरिकी नेवी के साथ-साथ वहां से गुजर रहे कुछ व्यापारिक जहाजों को भी निशाना बनाने की कोशिश की है। इन ड्रोनों ने अमेरिकी जहाजों के संचार तंत्र और ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुँचाया है।
हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग का दावा है कि उनकी 'एंटी-ड्रोन' डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश हमलों को नाकाम कर दिया है, लेकिन समुद्र के बीचों-बीच इस तरह का सीधा हमला दशकों में पहली बार देखा गया है।
इस ताज़ा हमले के बाद पूरे क्षेत्र में 'रेड अलर्ट' जारी कर दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी, जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग हैं, अब रणक्षेत्र में तब्दील हो चुके हैं।
ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक उसके जब्त किए गए जहाज को नहीं छोड़ा जाता और अमेरिका अपनी नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक उसके ड्रोन हमला जारी रखेंगे। दूसरी ओर, अमेरिका ने भी अपनी पांचवीं फ्लीट को हाई अलर्ट पर रखकर जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच समुद्र में छिड़ी इस जंग का सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ना शुरू हो गया है। जहाजों पर ड्रोन हमलों की खबर से समुद्री बीमा दरों में भारी बढ़ोतरी हुई है और शिपिंग कंपनियों ने अपने रास्ते बदलने शुरू कर दिए हैं।
अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट सकती है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं। भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी इस 'बदलापुर' कूटनीति के कारण हलचल मच गई है।