Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है क्योंकि ईरान ने सऊदी अरब स्थित अमेरिका के 'प्रिंस सुल्तान एयर बेस' पर बड़ा हमला बोल दिया है।
इस हमले में कम से कम 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। नवनियुक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक एक दिन बाद यह हमला हुआ है जिसमें उन्होंने ईरान के 'नष्ट' होने का दावा किया था।
Satellite imagery appears to confirm a U.S. Air Force KC-135 Stratotanker has been destroyed and several others possibly damaged, as a result of an Iranian attack earlier today, utilizing ballistic missiles and drones, against Prince Sultan Air Base in Saudi Arabia.
— OSINTdefender (@sentdefender) March 27, 2026
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WSJ: Ten American service members were wounded in an Iranian attack on the Prince Sultan air base in Saudi Arabia Friday, according to multiple U.S. and Arab officials. Two of the service members are considered seriously wounded, the officials said.
— World Source News (@Worldsource24) March 27, 2026
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ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को 'चुन-चुनकर' निशाना बनाएगा, और इस ताजा हमले ने क्षेत्र में एक पूर्ण युद्ध की आशंका को और प्रबल कर दिया है।
प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से प्रहार
राजधानी रियाद के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर शुक्रवार देर रात ईरान की ओर से एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे गए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हमला इतना सटीक था कि मिसाइलें सीधे उस ढांचे पर गिरीं जहाँ अमेरिकी सैनिक मौजूद थे।
इस हमले में 12 सैनिक घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों से पुष्टि हुई है कि हमले के दौरान बेस पर मौजूद कई रिफ्यूलिंग विमान और एक ई-3 सेंट्री अवाक्स (AWACS) विमान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
ईरान का पलटवार और 'चुन-चुनकर' मारने की चेतावनी
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस हमले के बाद एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि यह उन हमलों का जवाब है जो उनकी संप्रभुता के खिलाफ किए गए थे। ईरान ने स्पष्ट तौर पर सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी 'आतंकवादी' सेना को न करने दें।
ईरान का दावा है कि वह अब केवल रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक नीति अपनाएगा और जहाँ भी अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, वे उनके निशाने पर रहेंगे। इस हमले से पहले ईरान ने नागरिकों को उन इलाकों से दूर रहने की भी सलाह दी थी जहाँ अमेरिकी सैन्य संपत्तियां मौजूद हैं, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में ऐसे और हमले हो सकते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और सैन्य जवाबी कार्रवाई के संकेत
इस हमले के बाद व्हाइट हाउस में हलचल तेज हो गई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ आपातकालीन बैठक की है। ट्रंप ने पहले ही ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए थे और अब इस हमले के बाद उन्होंने कहा है कि "ईरान एक बड़ी गलती कर रहा है और उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।"
अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिकों और विमानवाहक पोत 'यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश' को भी तैनात करने का फैसला किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान की मिसाइल क्षमताओं और नौसेना को पूरी तरह से बेअसर करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रहे हैं।
मिडिल ईस्ट में तेल संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
सऊदी अरब जैसे तेल उत्पादक देश के सैन्य बेस पर हुए इस हमले ने वैश्विक बाजार में भी खलबली मचा दी है। फारस की खाड़ी और होर्मुज में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं।
वैश्विक निवेशकों के बीच डर का माहौल है कि यदि यह संघर्ष और फैला तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। कई देशों ने अपनी एयरलाइन्स को इस क्षेत्र के ऊपर से उड़ान न भरने की सलाह दी है।







