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ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका ने न केवल अपने 13 सैनिक खोए हैं, बल्कि उसके अर्ली वार्निंग रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे अरबों डॉलर के साजो-सामान को भी भारी क्षति पहुँची है।

वॉशिंगटन : ईरान के खिलाफ जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) अमेरिका के लिए सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर अत्यंत महंगा साबित हो रहा है। पिछले दो हफ्तों में ईरान के जवाबी हमलों ने अमेरिकी सेना के अजेय माने जाने वाले सुरक्षा कवच को न केवल भेदा है, बल्कि उसे बड़े स्तर पर नुकसान भी पहुँचाया है।

रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व के कम से कम 17 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अब तक अलग-अलग स्तर पर हमले हुए हैं, जिसमें बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई जैसे देशों में स्थित बेस शामिल हैं। इन हमलों ने अमेरिकी प्रशासन को भीतर से झकझोर दिया है और युद्ध के जोखिमों पर नई बहस छेड़ दी है।

​मानवीय क्षति और कैंप अरिफजान का घातक ड्रोन हमला 
युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका ने अपने 13 जांबाज सैनिकों को खो दिया है, जबकि 140 से अधिक सैन्यकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सबसे दर्दनाक घटना कुवैत के कैंप अरिफजान में हुई, जहा एक ईरानी आत्मघाती ड्रोन हमले ने एक साथ छह अमेरिकी सैनिकों की जान ले ली।

इस घटना के बाद अमेरिका के भीतर युद्ध को लेकर विरोध और बहस तेज हो गई है। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने हमले बंद नहीं करते, उसकी जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी और वह इस संघर्ष को लंबे समय तक खींचने के लिए तैयार है।

​अरबों डॉलर के रडार और THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर प्रहार 
सैन्य उपकरणों के नुकसान के मामले में सबसे बड़ा आर्थिक झटका कतर के अल उदेद एयर बेस पर लगा है। यहाँ तैनात अमेरिका का अत्याधुनिक AN/FPS-132 अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम ईरानी मिसाइल हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।

इस अकेले रडार सिस्टम की कीमत लगभग 9 हजार करोड़ रुपये (1.1 बिलियन डालर ) बताई जा रही है। इसके अलावा, यूएई में तैनात अमेरिका के सबसे भरोसेमंद THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है, जिसकी कुल कीमत करीब 22 हजार करोड़ रुपये है। अगर ये नुकसान पूरी तरह पुष्ट होते हैं, तो यह अमेरिका की हवाई सुरक्षा क्षमता पर अब तक का सबसे बड़ा आघात होगा।

​लड़ाकू विमानों का नुकसान और 'फ्रेंडली फायर' की बड़ी चूक 
हवाई मोर्चे पर भी अमेरिका को लगातार झटके लग रहे हैं। इराक के हवाई क्षेत्र में अमेरिका का एक KC-135 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसे अमेरिकी सेना तकनीकी खराबी बता रही है, जबकि ईरानी मीडिया इसे हमले का नतीजा बता रहा है। इससे पहले, कुवैत में एक बड़ी सैन्य चूक के दौरान कुवैती एयर डिफेंस सिस्टम ने गलती से अमेरिका के तीन F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमानों को निशाना बना लिया था।

हालांकि इन विमानों के सभी छह पायलट सुरक्षित बचा लिए गए थे, लेकिन इन लड़ाकू विमानों का नष्ट होना अमेरिकी वायुसेना के लिए एक बड़ी क्षति है।

​सबसे बड़े युद्धपोत 'यूएसएस गेराल्ड' में आग और फिफ्थ फ्लीट पर हमला 
दुनिया के सबसे बड़े और महंगे विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर. फोर्ड में लाल सागर में तैनाती के दौरान आग लगने की घटना ने भी सुर्खियां बटोरीं। हालांकि अमेरिकी नेवी का दावा है कि आग लॉन्ड्री सेक्शन में लगी थी और प्रोपल्शन प्लांट सुरक्षित है, लेकिन युद्ध के बीच इस तरह की घटना ने सवाल खड़े किए हैं।

वहीं, बहरीन के मनामा में स्थित अमेरिकी नौसेना के 'फिफ्थ फ्लीट' मुख्यालय पर भी ईरानी मिसाइलों के गिरने की खबर है, जिससे वहां स्थित दो सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल और कई इमारतों को भारी नुकसान पहुँचा है।

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