Iran-US War: फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार, 13 मार्च को पुष्टि की कि इराक के उत्तरी कुर्द क्षेत्र स्थित इरबिल में एक सैन्य बेस को निशाना बनाकर किए गए हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई है। इस हमले में छह अन्य सैनिकों के घायल होने की भी खबर है। राष्ट्रपति मैक्रों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे "अस्वीकार्य" करार दिया है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जताया दुख
राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि चीफ वारंट ऑफिसर अरनॉड फ्रियन इरबिल क्षेत्र में तैनात थे और उन्होंने "फ्रांस के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए" हैं। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि इराक में फ्रांसीसी सेना की मौजूदगी केवल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए है। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध ऐसे हमलों को कतई उचित नहीं ठहरा सकता। फ्रांस दुख की इस घड़ी में शहीद के परिजनों और घायल सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा है।
L’adjudant-chef Arnaud Frion du 7ème bataillon de chasseurs alpins de Varces est mort pour la France lors d’une attaque dans la région d’Erbil en Irak.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) March 13, 2026
À sa famille, à ses frères d’armes, je veux dire toute l’affection et la solidarité de la Nation.
Plusieurs de nos militaires…
आतंकवाद विरोधी मिशन पर तैनात थे सैनिक
इरबिल में तैनात फ्रांसीसी सैनिक एक बहुराष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा हैं, जो 2015 से इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ इराकी सेना का सहयोग कर रहा है। यह हमला तब हुआ जब फ्रांसीसी सैन्य बेस को निशाना बनाकर एक ड्रोन दागा गया। इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों, जिन्हें 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' कहा जाता है, ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इन समूहों का कहना है कि वे क्षेत्र में पश्चिमी देशों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाना जारी रखेंगे।
इराक बना युद्ध का 'दूसरा मैदान'
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी सीधी जंग में इराक अब "दूसरे युद्धक्षेत्र" के रूप में उभर रहा है। तेहरान और उसके सहयोगी समूह लगातार उन ठिकानों को निशाना बना रहे हैं जहां अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय सेनाएं मौजूद हैं। बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास, इरबिल स्थित वाणिज्य दूतावास और बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास स्थित 'विक्ट्री बेस' पर भी हमलों का खतरा बना हुआ है। इराक में सक्रिय एक अन्य ईरान समर्थक समूह 'अशब अहल अल-कहफ' ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में फ्रांसीसी हित अब उनके निशाने पर रहेंगे।
खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी इस युद्ध में खाड़ी के अन्य देश भी प्रभावित हो रहे हैं। ईरान ने न केवल इराक, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे देशों में भी कई बार मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। दुबई जैसे वैश्विक व्यापारिक केंद्रों के पास भी हाल ही में मिसाइल इंटरसेप्शन की घटनाएं देखी गई हैं। इराक में फ्रांसीसी सैनिक की मौत यह दर्शाती है कि यह संघर्ष अब वैश्विक शक्तियों को अपनी चपेट में लेने लगा है, जिससे क्षेत्र में शांति की संभावनाएं और धुंधली हो गई हैं।









