अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ईरान पर पूर्ण विजय का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान में अमेरिकी मिशन पूरा हो गया है और अब युद्ध समाप्ति की ओर है।

Donald Trump Speech: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के 'ओवल ऑफिस' से राष्ट्र के नाम बेहद आक्रामक संबोधन दिया है। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच ट्रंप ने दुनिया के सामने अपनी 'प्रचंड जीत' का ऐलान कर दिया है।

ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि ईरान में अमेरिकी सेना का 'मिशन' अब पूरी तरह सफल हो चुका है और जिस खतरे से पूरी दुनिया डर रही थी, उसे अमेरिका ने जड़ से खत्म कर दिया है। ट्रंप का यह भाषण ऐसे समय में आया है जब ईरान के भीतर सत्ता परिवर्तन की खबरें तेज हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में जिन महत्वपूर्ण तथ्यों और रणनीतिक फैसलों का जिक्र किया:-

मिशन 'अकम्प्लिश्ड' का ऐलान:- ट्रंप ने गर्व से घोषणा की कि "हमने ईरान में अपना सैन्य मिशन पूरा कर लिया है।" उन्होंने बताया कि अमेरिकी वायुसेना और विशेष दस्तों ने ईरान के उन सभी रणनीतिक ठिकानों को निष्क्रिय कर दिया है जो वैश्विक शांति के लिए खतरा थे। अब यह युद्ध अपने अंतिम चरण में है।

रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन):- ट्रंप ने एक बहुत बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान के लगभग सभी शीर्ष नेता और सैन्य कमांडर मारे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि "हमने वहां का रिजीम (शासन) बदल दिया है।" अब ईरान में वह पुरानी कट्टरपंथी व्यवस्था नहीं रहेगी जो दशकों से आतंकवाद को फंड कर रही थी।

परमाणु हथियार की दहलीज पर था ईरान:- ट्रंप ने खुलासा किया कि खुफिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान परमाणु हथियार बनाने के 'बेहद करीब' पहुंच गया था। उन्होंने कहा, "अगर हमने आज कार्रवाई नहीं की होती, तो कल ईरान एक परमाणु ब्लैकमेलर बन जाता।" उन्होंने कसम खाई कि उनके रहते ईरान कभी परमाणु शक्ति नहीं बन पाएगा।

यूरोप और अमेरिका पर सीधा खतरा:- ट्रंप ने बताया कि हमला करना इसलिए जरूरी था क्योंकि ईरान लंबी दूरी की ऐसी मिसाइलें विकसित कर चुका था, जो न केवल इजरायल, बल्कि सीधे यूरोप और अमेरिका के शहरों को निशाना बना सकती थीं। इस खतरे को खत्म करना अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य था।

​'हमें उनका तेल नहीं चाहिए':- तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका को ईरान के तेल की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "हम ऊर्जा के मामले में खुद आत्मनिर्भर हैं। यह जंग तेल के लिए नहीं, बल्कि दुनिया को एक बड़े नरसंहार से बचाने के लिए लड़ी गई है।"

कोई नई डील नहीं:- ट्रंप ने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए साफ कहा कि वह ईरान के साथ अब कोई 'परमाणु समझौता' या 'कागजी डील' नहीं करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पुराने समझौतों ने केवल ईरान की तिजोरी भरी, लेकिन अब शर्तें केवल अमेरिका ही तय करेगा।

सैन्य कार्रवाई को ठहराया जायज:- ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमला किसी देश की संप्रभुता छीनने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले तीसरे विश्व युद्ध को रोकने के लिए एक 'जरूरी कदम' था। उन्होंने इस जंग को दुनिया के हक में बताया।

ईरान की मिसाइल शक्ति का अंत:- राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड्स और भूमिगत गोदामों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है। अब ईरान के पास इतनी ताकत नहीं बची कि वह अपने पड़ोसियों या किसी भी पश्चिमी देश को धमकी दे सके।

इजरायल और सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा:- ट्रंप ने इजरायल का जिक्र करते हुए कहा कि अब उनके सबसे करीबी मित्र देश पर मंडरा रहा अस्तित्व का खतरा खत्म हो गया है। उन्होंने नाटो सहयोगियों से भी अपील की कि वे इस नई शांति व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग करें।

युद्ध की समाप्ति और भविष्य का खाका:- ट्रंप ने संकेत दिए कि अब अमेरिकी सेनाएं धीरे-धीरे अपनी भूमिका कम करेंगी, क्योंकि मुख्य दुश्मन का खात्मा हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब मिडिल ईस्ट में एक नए युग की शुरुआत होगी जहां विकास और व्यापार होगा, न कि आतंकी साजिशें।

NATO और सहयोगियों को संदेश:- ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों और अपने अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी जिम्मेदारी निभा दी है और अब दुनिया को इस नए सुरक्षित माहौल में साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।

ईरान की नौसेना का पूरी तरह सफाया:- ट्रंप ने अपने संबोधन में एक और बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की पूरी नौसेना को समुद्र में दफन कर दिया गया है। 150 से अधिक ईरानी जहाजों को नष्ट कर दिया गया है, जिससे ईरान की समुद्र में हमला करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

सहयोगी देशों को कड़ी चेतावनी:- ट्रंप अपने सहयोगियों पर भी जमकर बरसे। उन्होंने ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा, "अपना तेल खुद बचाओ!" ट्रंप ने कहा कि जो देश इस युद्ध में अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नहीं खड़े हुए, अमेरिका उनकी सुरक्षा के लिए अब अपना पैसा और संसाधन खर्च नहीं करेगा। उन्होंने इन देशों को खुद होर्मुज की खाड़ी में जाकर अपना रास्ता साफ करने की सलाह दी।

अंतिम समयसीमा और 'स्टोन एज' की धमकी:-ट्रंप ने कहा कि अगले 2 से 3 हफ्तों में वह ईरान में अपना पूरा काम खत्म कर देंगे। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि ईरान ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को तुरंत व्यापार के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के सभी बिजली घरों, रिफाइनरियों और तेल के कुओं को उड़ा देगा और ईरान को 'पत्थर युग' में वापस भेज देगा।

ईरान के राष्ट्रपति की युद्धविराम की पेशकश:-संबोधन के दौरान ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान के राष्ट्रपति ने उनसे युद्धविराम की गुहार लगाई है। हालांकि, ट्रंप ने शर्त रखी है कि जब तक होर्मुज का रास्ता पूरी तरह नहीं खुलता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का नामोनिशान नहीं मिटता, तब तक हमला जारी रहेगा।