पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ब्रिटेन ने पासा पलट दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर जमीनी हमले की तैयारियों के बीच ब्रिटेन ने युद्ध में शामिल होने के बजाय 'होर्मुज समिट' की मेजबानी करने का ऐलान किया है।

Middle East Conflict: ईरान-अमेरिका युद्ध के 34वें दिन ब्रिटेन ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने वाशिंगटन में हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि ब्रिटेन, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 'जमीनी आक्रमण' का हिस्सा नहीं बनेगा। ब्रिटेन का मानना है कि ईरान के साथ सीधा युद्ध न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा, बल्कि इससे शरणार्थी संकट और कट्टरपंथ भी बढ़ेगा।

ब्रिटेन ने इसके विकल्प के रूप में एक 'होर्मुज समिट' आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें प्रमुख तेल आयातक देशों और खाड़ी के देशों को आमंत्रित किया जाएगा।

​होर्मुज समिट: क्या है ब्रिटेन का मास्टर प्लान?

​ब्रिटेन का तर्क है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कब्जा या वहां युद्ध होना दुनिया के लिए सुसाइड जैसा होगा। लंदन में प्रस्तावित इस समिट का मुख्य उद्देश्य एक 'इंटरनेशनल नेवल टास्क फोर्स' बनाना है, जो केवल व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करे, न कि ईरान पर हमला।

ब्रिटेन चाहता है कि इस वार्ता में भारत, चीन और यूरोपीय देशों को भी शामिल किया जाए ताकि ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके। ब्रिटेन का यह कदम ट्रंप के उस प्लान के खिलाफ है जिसमें वे खार्ग आइलैंड पर कब्जे की बात कर रहे थे।

​ट्रंप की नाराजगी और कूटनीतिक दरार

​राष्ट्रपति ट्रंप ब्रिटेन के इस फैसले से बेहद खफा हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि 'अंतिम प्रहार' के समय ब्रिटेन का पीछे हटना ईरान के हौसले बढ़ाएगा। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता वैश्विक तेल सप्लाई को सुचारू रखना है। ब्रिटेन को डर है कि यदि युद्ध बढ़ा, तो लंदन और यूरोप में तेल की कीमतें असहनीय हो जाएंगी।

इस कूटनीतिक खिंचाव ने नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच भी मतभेद पैदा कर दिए हैं, जहां कई यूरोपीय देश अब ब्रिटेन के सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे हैं।

​भारत और अन्य तेल आयातक देशों के लिए मायने

​ब्रिटेन की इस पहल का भारत जैसे देशों ने परोक्ष रूप से स्वागत किया है। भारत पहले से ही होर्मुज में तनाव कम करने का पक्षधर रहा है। यदि यह समिट सफल होती है और युद्ध टलता है, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी और तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगेगी।

हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान और अमेरिका इस समिट के मेज पर आएंगे? फिलहाल, ब्रिटेन ने शांति की दिशा में एक बड़ा जोखिम भरा कदम उठाया है, जिसने ट्रंप की युद्ध मशीनरी पर ब्रेक लगा दिया है।