मथुरा: वृंदावन का पावन केसी घाट शुक्रवार को चीख-पुकार और मातम का गवाह बन गया। एक खुशहाल परिवार, जो बांके बिहारी के दर्शन के लिए पंजाब से आया था, उसकी खुशियां यमुना की लहरों में समा गईं।
क्षमता से अधिक भार और नाविक की हठधर्मी ने एक ऐसी त्रासदी को जन्म दिया जिसने अब तक 11 मासूम जिंदगियों को लील लिया है। नदी से निकलती लाशें और अपनों को खो चुके परिजनों का विलाप देखकर पत्थर दिल भी पसीज जाए। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी मथुरा के इस हादसे में मृतक परिजनों से मुलाकात की।
प्रशासन और सेना की संयुक्त टीमें अब भी लापता लोगों की तलाश में मौत से लड़ रही हैं, लेकिन उम्मीदें वक्त के साथ धुंधली होती जा रही हैं।
शनिवार सुबह जब रेस्क्यू टीम ने देवरहा बाबा घाट के पास से एक युवक का शव निकाला, तो वहां मौजूद उसके बुजुर्ग पिता फूट-फूट कर रो पड़े। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं।
मृतकों में एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं, जिनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा जैसे करीबी रिश्ते थे। पंजाब से आए इन श्रद्धालुओं की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं।
कैसे हुआ हादसा? चश्मदीद की जुबानी
हादसे में जीवित बचे एक युवक ने बताया कि नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना के बीच में थी, तभी करीब 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगीं। नाव डगमगाने लगी और नाविक ने नियंत्रण खो दिया।
पर्यटकों ने नाविक से चिल्लाकर कहा कि 'पुल आने वाला है, नाव रोक लो', लेकिन उसने अनसुना कर दिया। नाव दो बार पीपा पुल से टकराने से बची, लेकिन तीसरी बार जोरदार टक्कर हुई और नाव बीच नदी में पलट गई।
नाविक की बड़ी लापरवाही, जांच शुरू
शुरुआती जांच में सामने आया है कि नाव की क्षमता 40 लोगों की थी, लेकिन किसी भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। हादसे के बाद फरार हुए आरोपी नाविक पप्पू निषाद को पुलिस ने 6 घंटे बाद रात 9 बजे हिरासत में ले लिया है।
वह श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाकर लाया था। नदी में 25 फीट गहरा पानी और तेज बहाव होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मुश्किलें आ रही हैं।
रेस्क्यू में जुटे 250 जवान
वर्तमान में सेना, एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों समेत करीब 250 लोगों की टीम रेस्क्यू में लगी हुई है। अफसरों का कहना है कि यमुना का बहाव तेज है और नदी में भारी गाद है, जिसके कारण शवों के दबने की आशंका है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, शवों के फूलकर ऊपर आने की उम्मीद जताई जा रही है।