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उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत आयुष्मान कार्ड बनाने में यूपी देश का नंबर-1 राज्य बन गया है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आम आदमी तक सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत कार्ड बनाने के मामले में यूपी अब देश का अग्रणी राज्य बन गया है। प्रमुख सचिवअमित कुमार घोष द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन बेहद शानदार रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों और सरकार की सक्रियता के चलते यूपी ने देश के अन्य विकसित राज्यों को भी इस प्रतिस्पर्धा में पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि गरीब और वंचित वर्ग को मुफ़्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

​15 जनवरी से चला विशेष अभियान और नए आंकड़े

​प्रदेश में आयुष्मान कार्डों की संख्या बढ़ाने के लिए 15 जनवरी से 30 मार्च 2026 तक एक विशेष अभियान चलाया गया था। मिशन डायरेक्टर अर्चना वर्मा द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, केवल इस ढाई महीने के अभियान के दौरान ही प्रदेश में 19 लाख 81 हजार नए आयुष्मान कार्ड बनाए गए।

इस गति ने यूपी को राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 5 करोड़ 70 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।

​बरेली और आजमगढ़ ने मारी बाजी: टॉप जिलों की सूची

​आयुष्मान कार्ड बनाने की दौड़ में उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों ने असाधारण प्रदर्शन किया है। जिलों की रैंकिंग में बरेली 1,24,096 कार्ड बनाकर पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर काबिज है। वहीं, आजमगढ़ 1,10,821 कार्डों के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इस सूची में अन्य प्रमुख जिले इस प्रकार हैं:

​जौनपुर: 91,954 कार्ड (तीसरा स्थान)

​प्रयागराज: 82,862 कार्ड (चौथा स्थान)

​आगरा: 79,603 कार्ड (पांचवां स्थान)

इन टॉप-5 जिलों ने मिशन मोड में काम करते हुए लाखों परिवारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाने का काम किया है।

​आम जनता को मुफ़्त इलाज और भविष्य की योजना

​आयुष्मान कार्ड की इस सफलता का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के करोड़ों गरीब परिवारों को मिल रहा है। इस कार्ड के माध्यम से सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ़्त इलाज मिलता है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रदेश के शत-प्रतिशत पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ दिया जाए।

स्वास्थ्य विभाग अब उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहाँ कार्ड बनाने की गति थोड़ी धीमी है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटलीकरण और 'आपके द्वार आयुष्मान' जैसे अभियानों ने ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने और कार्ड बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने में बहुत मदद की है।

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