लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में संगठन को बूथ स्तर तक अभेद्य बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में जिला समितियों के पुनर्गठन को लेकर बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है।
रणनीति के तहत पार्टी ने ब्रज और पश्चिम क्षेत्र के बाद अब काशी और कानपुर क्षेत्र की जिला समितियों के नामों को भी अंतिम रूप दे दिया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य संगठन में नई ऊर्जा फूँकना और आगामी विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन सुनिश्चित करना है।
अवध क्षेत्र की जिला समितियों पर चर्चा
लखनऊ में अवध क्षेत्र को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिला प्रभारी, जिला अध्यक्ष और विशेष पर्यवेक्षक मौजूद हैं।
बैठक का मुख्य एजेंडा अवध क्षेत्र के जिलों के लिए नए पदाधिकारियों के नामों पर मुहर लगाना है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी उन चेहरों को प्राथमिकता दे रही है जो स्थानीय समीकरणों में फिट बैठते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ रखते हैं।
RSS के साथ समन्वय और 2027 की बड़ी रणनीति
संगठन के इस नए ढांचे को तैयार करने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ भी गहरा तालमेल बिठाया जा रहा है। तीन दिवसीय बैठकों के इस दौर में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी यह सुनिश्चित कर रही है कि नियुक्तियां वैचारिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर प्रभावी हों।
भाजपा का पूरा ध्यान इस समय उन पदाधिकारियों को आगे लाने पर है जो बूथ स्तर तक सक्रिय रहकर विपक्षी दलों के गठबंधन की काट तैयार कर सकें। संगठन में होने वाला यह बड़ा बदलाव आगामी सात दिनों के भीतर सार्वजनिक किया जा सकता है।
बूथ स्तर पर मजबूती: 'मिशन 2027' के लिए नई कार्यकर्ता सेना तैयार
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनाव जीतने की असली चाबी मजबूत बूथ कमेटियों के पास होती है। इसीलिए जिला इकाइयों के गठन में उन नेताओं को तरजीह दी जा रही है जिनका फीडबैक जमीन पर सकारात्मक है।
पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह की जोड़ी जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के बीच तालमेल बिठाने में जुटी है। अवध क्षेत्र की बैठक के बाद भाजपा की यह नई 'कार्यकर्ता सेना' सीधे चुनावी मैदान में उतर जाएगी, जिसका एकमात्र लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का परचम लहराना है।