लखनऊ में ईद की नमाज को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर में 2000 से अधिक पुलिसकर्मी और पीएसी तैनात की गई है।

लखनऊ: राजधानी लखनऊ में शनिवार को मनाई जाने वाली ईद-उल-फितर और उससे पहले अलविदा की नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत सख्त कर दी गई है। शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार संपन्न कराने के लिए लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने जमीन से लेकर आसमान तक निगरानी का मास्टरप्लान तैयार किया है।

विशेष रूप से पुराने लखनऊ के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

​सुरक्षा का भारी बंदोबस्त: 2000 से ज्यादा जवान और पीएसी तैनात 
​ईद की नमाज के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों को सड़कों पर उतारा गया है। इसमें जिला पुलिस के अलावा पीएसी (PAC) की कई कंपनियां और आरएएफ (RAF) की टुकड़ियां शामिल हैं। ऐशबाग ईदगाह, टीले वाली मस्जिद और आसिफी इमामबाड़ा जैसे प्रमुख नमाज स्थलों पर निगरानी रहेगी।

पुलिस कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मी भीड़ के बीच मौजूद रहेंगे ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

​ड्रोन और सीसीटीवी से 'डिजिटल' निगरानी: अफवाह फैलाने वालों पर नजर 
सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है। पुराने लखनऊ के गलियों और संवेदनशील मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों के जरिए छतों और सड़कों की निगरानी की जा रही है।

इसके अलावा, नगर निगम के कंट्रोल रूम और पुलिस के हाई-टेक सीसीटीवी नेटवर्क से हर हरकत को रिकॉर्ड किया जा रहा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले या शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

​ट्रैफिक डायवर्जन और नमाजियों के लिए विशेष इंतजाम 
नमाज के वक्त शहर के यातायात को सुचारू रखने के लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। ऐशबाग और पुराने लखनऊ की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर सुबह से ही बड़े वाहनों का प्रवेश वर्जित रहेगा।

प्रशासन ने धर्मगुरुओं के साथ बैठक कर यह सुनिश्चित किया है कि नमाज सड़कों पर न होकर निर्धारित परिसरों के भीतर ही अदा की जाए। नमाजियों की सुविधा के लिए पेयजल, साफ-सफाई और प्राथमिक चिकित्सा के भी इंतजाम किए गए हैं।

​फ्लैग मार्च और पीस कमेटी की सक्रियता

शांति का संदेश देने के लिए डीसीपी और एसीपी स्तर के अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और फ्लैग मार्च किया है।

पीस कमेटी के सदस्यों को भी सक्रिय किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर संवाद बना रहे। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा केवल नमाज स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजारों और सार्वजनिक पार्कों में भी पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है जहाँ त्योहार के दिन भारी भीड़ जुटने की संभावना है।