लखनऊ में RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने ‘घर वापसी’ को लेकर समाज से सम्मानपूर्वक स्वीकार करने की अपील की। घुसपैठ पर ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए तीन बच्चों का सुझाव भी दिया। पढ़ें बैठक की अहम बातें।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में थे। यहा आयोजित एक विशेष बैठक में उन्होंने हिंदू समाज की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और सामाजिक एकता को लेकर कई विचार साझा किए। 

मोहन भागवत ने 'घर वापसी' के अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण और तीखा आह्वान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग किसी कारणवश हिंदू धर्म छोड़कर चले गए थे और अब वापस लौटना चाहते हैं, समाज को उन्हें पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करना होगा।

​घुसपैठ पर 'ट्रिपल डी' फॉर्मूला: डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट
​बढ़ती घुसपैठ पर गहरी चिंता जताते हुए संघ प्रमुख ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और संसाधनों के लिए खतरा बन चुके घुसपैठियों की पहचान के लिए 'ट्रिपल डी' नीति अपनानी होगी—यानी उन्हें डिटेक्ट (पहचान), डिलीट (सूची से बाहर) और डिपोर्ट (देश से बाहर) करना होगा। उन्होंने समाज से यह भी अपील की कि किसी भी बाहरी या अवैध व्यक्ति को रोजगार न दिया जाए, ताकि उनकी जड़ें कमजोर की जा सकें।

​जनसांख्यिकीय संतुलन: 'कम से कम तीन बच्चे हों'
​मोहन भागवत ने हिंदू परिवार संरचना और जनसंख्या पर बात करते हुए एक बड़ा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। उनके अनुसार, समाज की जीवंतता और अस्तित्व को बचाए रखने के लिए परिवार का विस्तार आवश्यक है।

इसके साथ ही उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव पर प्रहार करते हुए कहा कि एक समय हमारे बीच कोई भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के साथ भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे अब जड़ से मिटाना होगा।

विभिन्न पंथों और मिशनों का संगम
​लखनऊ में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की खासियत यह रही कि इसमें केवल संघ के पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि हिंदू धर्म के विभिन्न अंगों और पंथों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस मंच पर सिक्ख, बौद्ध और जैन समाज के साथ-साथ रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम और आर्ट ऑफ लिविंग जैसी संस्थाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इसके अलावा संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।