लखनऊ : उत्तर प्रदेश के गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित करने वाले 'राइट टू एजुकेशन' (RTE) कानून के तहत इस बार रिकॉर्ड तोड़ आवेदन देखने को मिले हैं। सत्र 2026-27 के लिए पहले चरण की आवेदन प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है, जिसमें प्रदेश भर से कुल 2.25 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है।
योगी सरकार ने इस बार पिछले वर्षों की तुलना में प्रवेश का लक्ष्य भी काफी बढ़ा दिया है, जिससे प्रदेश के लाखों मध्यम और गरीब परिवारों में अपने बच्चों को बड़े स्कूलों में पढ़ाने की नई उम्मीद जगी है।
पिछले साल की तुलना में भारी उछाल
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल पहले चरण में प्राप्त आवेदनों की संख्या पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी अधिक है। पिछले वर्ष जहां आवेदनों की संख्या कम थी, वहीं इस बार विभाग के व्यापक प्रचार-प्रसार और ऑनलाइन प्रक्रिया में सुधार के कारण आवेदकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद और वाराणसी जैसे बड़े जिलों से सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस बार प्रदेश के करीब 5 लाख से अधिक बच्चों को आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिला दिलाया जाए।
पारदर्शी प्रक्रिया और लॉटरी सिस्टम
आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब शिक्षा विभाग इन आवेदनों की जांच करेगा। जिन बच्चों के दस्तावेज सही पाए जाएंगे, उन्हें लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। आरटीई के नियमों के अनुसार, निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटें इन बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। लॉटरी सिस्टम पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी होता है, ताकि बिना किसी भेदभाव के पात्र बच्चों को उनके घर के नजदीकी स्कूलों में प्रवेश मिल सके।
दूसरे और तीसरे चरण की तैयारी
पहले चरण के आवेदनों की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन अब दूसरे चरण की तैयारी में जुट गया है। जो परिवार पहले चरण में आवेदन करने से चूक गए हैं, उन्हें विभाग जल्द ही अगले चरण में मौका देगा।
बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्कूलों के साथ समन्वय बिठाएं ताकि लॉटरी के बाद बच्चों के प्रवेश में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली न हो। इसके साथ ही, विभाग उन निजी स्कूलों पर भी कड़ी नजर रख रहा है जो आरटीई के तहत बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी करते हैं।
डिजिटल साक्षरता और अभिभावकों का उत्साह
इस बार आवेदनों में हुई वृद्धि के पीछे डिजिटल साक्षरता को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सरकार ने मोबाइल ऐप और सहज ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया है कि अभिभावक अब खुद या नजदीकी जन सेवा केंद्रों से आसानी से फॉर्म भर पा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ने के कारण इस बार वहां से भी बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं। सरकार का मानना है कि यह अभियान शिक्षा के स्तर को सुधारने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक अधिकार पहुँचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
