अयोध्या : अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आज एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु अपने तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे के तहत गुरुवार को रामनगरी अयोध्या पहुँचीं। यहाँ उन्होंने न केवल रामलला के दर्शन किए, बल्कि मंदिर के द्वितीय तल पर अभिजीत मुहूर्त में पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना और पूजन किया। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति का यह दूसरा अयोध्या दौरा है, जो बेहद खास और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा।
एयरपोर्ट से मंदिर तक भव्य अगवानी: कलाकारों ने मोह लिया मन
राष्ट्रपति मुर्मु सुबह करीब 10:30 बजे दिल्ली से अयोध्या एयरपोर्ट पहुँचीं, जहाँ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी भव्य अगवानी की।
#WATCH | अयोध्या, उत्तर प्रदेश: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंचीं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने उनका स्वागत किया। pic.twitter.com/yt1lcSnwhE
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 19, 2026
#WATCH अयोध्या, उत्तर प्रदेश | राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंची। pic.twitter.com/tDnohpz15Z
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#WATCH अयोध्या, उत्तर प्रदेश: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में श्री राम यंत्र की स्थापना की।
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एयरपोर्ट से राम जन्मभूमि परिसर तक के रास्ते को दुल्हन की तरह सजाया गया था। इस मार्ग पर बने 20 से अधिक सांस्कृतिक मंचों पर लगभग 250 कलाकारों ने लोक नृत्यों और संगीत के माध्यम से राष्ट्रपति का स्वागत किया। अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति को 'नगर की चाबी' सौंपकर उनका सत्कार किया।
श्रीराम यंत्र: 150 किलो वजन, सोने की परत और कांचीपुरम का नाता
मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित किया गया 'श्रीराम यंत्र' विशेष चर्चा का विषय है।
बनावट: यह यंत्र कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया है और इसका वजन करीब 150 किलो है। इस पर शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई है।
धार्मिक महत्व: ज्योतिषाचार्य रघुनाथ दास शास्त्री के मुताबिक, यह एक विशेष वैदिक ज्यामितीय संरचना है, जिसमें भगवान राम और अन्य देवी-देवताओं की दिव्य ऊर्जा को मंत्रों के माध्यम से स्थापित किया गया है। इसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
शिल्पकारों का सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश
पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का भ्रमण किया और परकोटे में निर्मित माँ अन्नपूर्णा व माँ दुर्गा के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर निर्माण में दिन-रात जुटे कुछ चुनिंदा शिल्पकारों को सम्मानित भी किया। राष्ट्रपति ने रामायण कालीन सप्तर्षि मंदिरों के भी दर्शन किए, जहाँ से उन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया। दोपहर 12 बजे होने वाली 'मध्याह्न आरती' में भी राष्ट्रपति सम्मिलित हुईं और रामलला की आरती उतारी।
अयोध्या के बाद मथुरा: प्रेमानंद महाराज से करेंगी मुलाकात
अयोध्या में करीब 5 घंटे रुकने के बाद राष्ट्रपति दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना हो गईं। मथुरा में वे इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी। उनके दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुक्रवार, 20 मार्च को होगा, जब वे संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी। सुरक्षा कारणों से मथुरा और वृंदावन में भी पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।










