लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में 'अलग राज्य' के मुद्दे को हवा दे दी है। हाल ही में नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के लोकार्पण के बाद उन्होंने कहा कि इसकी पूरी रूपरेखा उनकी सरकार में तैयार किया गया था।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स (X) पर मायावती ने उत्तर प्रदेश के विभाजन और विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग प्रदेश बनाने की अपनी पुरानी मांग को दोहराया है। उन्होंने सत्ताधारी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विकास और प्रशासनिक सुगमता के लिए बड़े राज्यों का बंटवारा जरूरी है, लेकिन वर्तमान राजनीति के कारण जनता की यह मांग अनसुनी की जा रही है।
पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच का सपना कब होगा पूरा?
मायावती ने अलग प्रदेश की मांग के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की पुरानी पीड़ा को भी साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि "न जाने कब पश्चिम यूपी में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने का सपना पूरा होगा?" उन्होंने कहा कि मेरठ या आगरा जैसे शहरों में हाईकोर्ट बेंच न होने के कारण यहाँ के वादकारियों को न्याय के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर प्रयागराज जाना पड़ता है।
मायावती के अनुसार, बसपा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रदेश को चार हिस्सों (बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिमांचल और अवध प्रदेश) में बांटने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराया था, लेकिन केंद्र की तत्कालीन और वर्तमान सरकारों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रशासनिक कुशलता और जनता की सुविधा का तर्क
बसपा सुप्रीमो का तर्क है कि उत्तर प्रदेश की विशाल जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए लखनऊ से पूरे प्रदेश का प्रभावी प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों के गठन से न केवल शासन जनता के करीब पहुँचता है, बल्कि विकास की गति भी तेज होती है।
मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा और सपा जैसी पार्टियां केवल चुनावी लाभ के लिए जनता को गुमराह करती हैं, जबकि बसपा ने हमेशा से ही जनहित में बड़े राज्यों के पुनर्गठन की वकालत की है।
चुनावी समीकरणों और सियासी गलियारों में सुगबुगाहट
मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में आगामी चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन तलाशने के लिए बसपा ने 'अलग राज्य' और 'हाईकोर्ट बेंच' जैसे भावनात्मक और क्षेत्रीय मुद्दों को फिर से हथियार बनाया है।
यह मांग विशेष रूप से जाट और मुस्लिम बहुल बेल्ट में प्रभाव डाल सकती है, जहाँ किसान और वकील लंबे समय से हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर आंदोलनरत रहे हैं।
विपक्षी दलों और सरकार की संभावित प्रतिक्रिया
मायावती के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होने की संभावना है। जहाँ सत्ता पक्ष इसे 'विभाजनकारी राजनीति' करार दे सकता है, वहीं विपक्षी दल बसपा के इस पुराने स्टैंड पर उसे घेरने की कोशिश करेंगे।
हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्थानीय संगठनों ने मायावती की इस मांग का समर्थन किया है। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र और राज्य सरकार इस संवैधानिक जटिलता वाले मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया देती है या यह केवल एक चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगा।