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ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध की तपिश अब लखनऊ के बाजारों और उद्योगों तक पहुंच गई है। पिछले एक महीने में ही लखनऊ के विभिन्न उद्योगों को 1000 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा घाटा उठाना पड़ा है।

लखनऊ: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने लखनऊ की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। राजधानी लखनऊ से खाड़ी देशों को बड़े पैमाने पर चिकनकारी, जरदोजी, हस्तशिल्प और इत्र का निर्यात किया जाता है।

ताजा व्यापारिक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की वजह से शिपिंग रूट्स बाधित हो गए हैं, जिससे पिछले एक महीने के भीतर करीब 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है।

कई बड़े निर्यातकों के कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं और नए ऑर्डर मिलने पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

​चिकनकारी और हस्तशिल्प क्षेत्र में मची भारी खलबली 
लखनऊ की पहचान 'चिकनकारी' और 'जरदोजी' के काम पर इस अंतरराष्ट्रीय संकट का सबसे बुरा असर पड़ा है। खाड़ी देशों में इन उत्पादों की भारी मांग रहती है, लेकिन युद्ध के कारण उड़ानें और समुद्री रास्ते प्रभावित होने से माल समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।

स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि न केवल तैयार माल फंसा है, बल्कि कच्चे माल की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। इसके कारण हजारों कारीगरों के सामने काम का संकट पैदा हो गया है। यदि यह स्थिति कुछ और हफ्तों तक बनी रही, तो घाटे का यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है।

​सप्लाई चेन बाधित होने से फ्रेट चार्ज और लागत में इजाफा 
ईरान-इजरायल संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जोखिम बढ़ गया है, जिससे लॉजिस्टिक कंपनियों ने अपना 'फ्रेट चार्ज' बढ़ा दिया है। लखनऊ के उद्यमियों के अनुसार, पहले की तुलना में अब माल भेजने की लागत 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

इसके अलावा, तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण स्थानीय परिवहन भी महंगा हो गया है। सप्लाई चेन टूटने की वजह से कच्चा माल आने में देरी हो रही है, जिससे उत्पादन की गति धीमी पड़ गई है। छोटे और मंझोले उद्योगों के लिए बढ़ी हुई लागत को वहन करना अब नामुमकिन साबित हो रहा है।

​पेमेंट अटकने और नए समझौतों के रद्द होने से बढ़ी परेशानी 
युद्ध की स्थिति को देखते हुए विदेशी खरीदारों ने फिलहाल नए समझौतों और ऑर्डरों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सबसे बड़ी समस्या पुराने पेमेंट को लेकर आ रही है; अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग चैनल और कूरियर सेवाओं में व्यवधान के कारण करोड़ों रुपये का भुगतान अटक गया है।

लखनऊ के व्यापारिक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि निर्यातकों को विशेष राहत पैकेज या टैक्स में छूट दी जाए ताकि वे इस वैश्विक मंदी का सामना कर सकें। व्यापारियों को डर है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच युद्ध लंबा खिंचा, तो लखनऊ का विश्व प्रसिद्ध निर्यात बाजार पूरी तरह धराशायी हो सकता है।

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