haribhoomi hindi news
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ है। यहां बहन से छेड़छाड़ का बदला लेने के लिए एक दोस्त ने अपने ही दोस्त की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को मक्के के खेत में गाड़ दिया।

फर्रुखाबाद के गुजरपुर पमारान गांव में पिछले 9 महीनों से लापता ओमवीर राठौर की तलाश एक खौफनाक मोड़ पर समाप्त हुई। पुलिस ने मुख्य आरोपी रामू यादव की निशानदेही पर फर्रुखाबाद-बदायूं मार्ग के पास स्थित एक खेत में जेसीबी से खुदाई करवाई।

करीब 24 घंटे की कड़ी मशक्कत और 6 फीट गहरा गड्ढा खोदने के बाद पुलिस को ओमवीर का कंकाल, उसके कपड़े और अन्य सामान बरामद हुए। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और अवशेषों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि वैज्ञानिक आधार पर मौत के कारणों की पुष्टि की जा सके।

​शराब पिलाकर गला घोंटा और 6 फीट गहरे गड्ढे में दफनाया 
पुलिस की पूछताछ में आरोपी रामू यादव ने अपना जुर्म कबूल करते हुए हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया। रामू ने बताया कि वह 20 जुलाई को ओमवीर को उसके घर से बुलाकर ले गया था। पहले दोनों ने साथ बैठकर शराब पी और जब ओमवीर नशे में हो गया, तो रामू ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से उसने शव को पास के ही एक खेत में 6 फीट गहरे गड्ढे में गाड़ दिया। आरोपी ने सोचा था कि शव कभी नहीं मिलेगा, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया और 9 महीने बाद इस जघन्य हत्याकांड का राज खुल गया।

​बहन से छेड़छाड़ का बदला लेने के लिए रची थी साजिश 
इस हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह बहन से छेड़छाड़ की रंजिश बताई जा रही है। आरोपी रामू यादव ने पुलिस को बताया कि ओमवीर उसकी बहन के साथ छेड़छाड़ करता था, जिससे वह बेहद आहत और गुस्से में था।

इसी अपमान का बदला लेने के लिए उसने ओमवीर को रास्ते से हटाने का मन बनाया। दोस्ती का फायदा उठाकर वह उसे सुनसान जगह ले गया और वारदात को अंजाम दिया। यह घटना समाज में बढ़ रहे प्रतिशोध के खौफनाक चेहरे को दर्शाती है, जहाँ रंजिश के चलते एक युवक ने अपने ही करीबी दोस्त के साथ इस कदर बेरहमी की।

​पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल और लापरवाही की जांच के आदेश 
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक ओमवीर की पत्नी और मां का कहना है कि उन्होंने समय रहते ही गांव के कुछ संदिग्धों पर शक जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने तब सक्रियता नहीं दिखाई। परिजनों का मानना है कि अगर समय पर ठोस कार्रवाई होती, तो मामला इतना लंबा नहीं खिंचता।

इस लापरवाही का संज्ञान लेते हुए अपर पुलिस अधीक्षक ने पुरानी जांच में हुई ढिलाई की जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल, पुलिस इस कांड में शामिल अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है ताकि हत्याकांड की सभी कड़ियों को पूरी तरह जोड़ा जा सके।

7