लखनऊ: लखनऊ के बख्शी का तालाब तहसील अंतर्गत अस्ती गांव में गुरुवार सुबह 4 बजे प्रशासन का बड़ा 'बुलडोजर एक्शन' हुआ। तहसील स्तर के अधिकारी तड़के 3 बजे ही पीएसी की दो टुकड़ियों और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए थे।
प्रशासन ने मस्जिद को जमींदोज करने के लिए 3 बुलडोजर लगाए और करीब 1 घंटे की कार्रवाई में पूरी संरचना को ढहा दिया गया। कार्रवाई के तुरंत बाद मलबे को हटाने का काम शुरू हुआ।
इस दौरान पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था ताकि किसी भी तरह के विरोध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति को संभाला जा सके।
खलिहान की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का था मामला
पूरा विवाद बख्शी का तालाब तहसील के ग्राम अस्ती स्थित गाटा संख्या 648 की जमीन से जुड़ा है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार, यह 0.300 हेक्टेयर जमीन सरकारी खलिहान के तौर पर दर्ज है, जिसके 0.0300 हेक्टेयर हिस्से पर मस्जिद का निर्माण किया गया था।
प्रशासन ने 2024 में ही इसे अवैध अतिक्रमण मानते हुए कब्जा हटाने और दोषियों पर 36 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। हालांकि, स्थानीय निवासियों और मस्जिद प्रबंधन का दावा था कि यह मस्जिद करीब 60 साल पुरानी है और इसे नमाज पढ़ने के लिए बनाया गया था, लेकिन वे कोर्ट में जमीन पर अपना वैध अधिकार साबित नहीं कर पाए।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर प्रशासनिक आदेश को माना सही
मस्जिद पक्ष ने तहसीलदार और एडीएम कोर्ट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 25 मार्च 2026 को याचिकाओं को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया।
कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यूपी राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत ग्राम पंचायत की जमीन पर अवैध कब्जे को हटाने की प्रक्रिया संक्षिप्त होती है और इसमें गवाहों की जिरह अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने तहसीलदार और अपर जिलाधिकारी के बेदखली आदेश को सही ठहराया, जिसके बाद प्रशासन ने 31 मार्च को नोटिस चस्पा कर कब्जा हटाने की अंतिम चेतावनी दी थी।
विरोध की सूचना पर रात में ही एक्शन में जुटे एडीएम और एसडीएम
एडीएम प्रशासन राकेश सिंह के मुताबिक, रात में ही सूचना मिली थी कि कब्जा करने वाले पक्ष की ओर से विरोध की तैयारी की जा रही है। स्थिति को भांपते हुए एडीएम और एसडीएम ने रात में ही मौके का निरीक्षण किया और चेतावनी दी कि अवैध कब्जा हर हाल में हटाया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था में बाधा डालने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद प्रशासन ने रात के अंधेरे में रणनीतिक तरीके से ऑपरेशन शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह विधिक प्रक्रिया के तहत की गई है और अब सरकारी जमीन को पूरी तरह कब्जा मुक्त करा लिया गया है।