कानपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने एक संयुक्त ऑपरेशन में शहर के भीतर चल रहे अंतरराष्ट्रीय किडनी प्रत्यारोपण रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, मुख्य दलाल शिवम अग्रवाल और तीन अन्य अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, यह गिरोह पिछले दो वर्षों से सक्रिय था और अब तक 50 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट कर चुका है। गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े होने के प्रमाण भी मिले हैं, जिसमें दक्षिण अफ्रीका और नेपाल के मरीजों के नाम सामने आए हैं।
₹50 हजार का बकाया और छात्र की शिकायत से खुला राज
इस करोड़ों के काले कारोबार का अंत बिहार के समस्तीपुर निवासी और देहरादून में एमबीए के चौथे सेमेस्टर के छात्र आयुष की एक शिकायत से हुआ। आयुष को दलाल शिवम ने ₹10 लाख का लालच देकर अपनी किडनी देने के लिए तैयार किया था।
दरसल मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर नामक मरीज को यह किडनी लगाई गई, जिसके बदले गिरोह ने ₹60 लाख से अधिक वसूले। आयुष को ₹9.5 लाख दिए गए, लेकिन जब उसने बकाया ₹50 हजार मांगे, तो उसे धमकाया गया।
अपनी गिरती सेहत और धोखे से तंग आकर आयुष ने रावतपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिससे इस पूरे सिंडिकेट की परतें उधड़ती चली गईं।
'थ्री-हॉस्पिटल मॉडल': पकड़े जाने से बचने की शातिर चाल
जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह पुलिस की नजरों से बचने के लिए 'थ्री-हॉस्पिटल' सिस्टम का इस्तेमाल करता था। ऑपरेशन की शुरुआत आहूजा हॉस्पिटल केशवपुरम में होती थी, जहां डोनर की किडनी निकाली जाती थी और ट्रांसप्लांट की मुख्य प्रक्रिया होती थी।
इसके बाद, डोनर को रिकवरी के लिए प्रिया हॉस्पिटल कल्याणपुर और रिसीवर (किडनी पाने वाले) को मेडलाइफ हॉस्पिटल पनकी में शिफ्ट कर दिया जाता था।
डॉक्टरों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए इन मरीजों को पित्त की थैली गॉल ब्लैडर की पथरी का मरीज बताकर भर्ती कराया था।
विदेशी कनेक्शन और भविष्य की कानूनी कार्रवाई
इस गिरोह का लालच इतना बड़ा था कि इन्होंने विदेशी नागरिकों तक को नहीं छोड़ा। 3 मार्च को आहूजा हॉस्पिटल में दक्षिण अफ्रीका की एक महिला अरेबिका का भी अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था।
गिरोह डोनर और रिसीवर के बीच फर्जी रिश्ते साबित करने के लिए जाली आधार कार्ड और नोटरी से प्रमाणित शपथ पत्र तैयार करता था। फिलहाल, पुलिस की टीमें दिल्ली, नोएडा और लखनऊ में उन बाहरी सर्जनों की तलाश कर रही हैं, जो विशेष रूप से ये अवैध ऑपरेशन करने के लिए बुलाए जाते थे। स्वास्थ्य विभाग ने तीनों अस्पतालों को सील करने और उनकी मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।