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इंदौर में नगर निगम की एमआईसी बैठक में शुक्रवार, 13 मार्च को एक अहम फैसला लिया गया है। 1963 में बने ‘छोटा नेहरू स्टेडियम’ का नाम बदलकर ‘छत्रपति शिवाजी महाराज स्टेडियम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस फैसले ने शहर की राजनीति और विकास की प्राथमिकताओं पर नई बहस छेड़ दी है।

इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि स्टेडियम परिसर के पास स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के कारण इस क्षेत्र की पहचान उनके नाम से होना उचित है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा- 'कौन है छोटा नेहरू'?

हालांकि, नाम बदलने पर किसी को आपत्ति नहीं है और न ही छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर किसी को कोई ऐतराज है। लेकिन सवाल यह उठता है कि नाम बदलने से क्या बदल जाएगा? क्या नाम बदलने से ज्यादा जरूरी शहर की बुनियादी समस्याओं, सड़क, पानी, बिजली और ड्रेनेज का समाधान करना नहीं है?

सबसे बड़ा सवाल-
क्या नाम बदलने से वास्तव में कुछ बदलेगा या यह सिर्फ राजनीतिक प्रतीकवाद है?

इन्हीं सवालों पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष चर्चा में राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी-अपनी राय रखी।

चर्चा में शामिल हुए

  • आशीष शर्मा – भाजपा विधायक
  • श्रवण गर्ग – वरिष्ठ पत्रकार
  • जेपी धनोपिया – वरिष्ठ कांग्रेस नेता

सवाल मध्यप्रदेश का...इस खास पेशकश में किसने क्या कहा?
ऊपर दिए गए वीडियो में देखिए पूरी बहस।

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