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भोपाल और इंदौर में 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप के मामले बढ़ रहे हैं। कई कपल्स के बीच मतभेद होने पर विवाद मध्यस्थता केंद्र तक पहुंच रहे हैं, जिससे बदलते सामाजिक रिश्तों की नई तस्वीर सामने आ रही है।

भोपाल। समाज तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव का असर रिश्तों पर भी पड़ा है। रिश्तों को  लेकर लोगों की सोच अब पहले जैसी नहीं रही। पहले लिव-इन रिलेशनशिप को आमतौर पर युवा जोड़ों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब उम्रदराज लोग भी इस तरह के रिश्तों को महत्व दे रहे हैं।  भोपाल और इंदौर जैसे शहरों से सामने आए कुछ मामलों से यह स्पष्ट होता है कि 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग भी प्रेम संबंधों के कारण लिव-इन में रहना  पसंद करते हैं। हालांकि, अधिक उम्र के बाद भी इन रिश्तों में मतभेद और विवाद पैदा होते हैं और अंततः समाधान की तलाश में उन्हें मध्यस्थता केंद्र और अदालत की ओर रुख करना होता है। 

भोपाल मध्यस्थता केंद्र में आए ऐसे 49 विवाद
आंकड़ों के अनुसार पिछले साल केवल भोपाल और इंदौर से ही लगभग तीन दर्जन ऐसे मामले सामने आए, जिनमें 50 वर्ष से अधिक उम्र के जोड़े लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े विवादों को लेकर मध्यस्थता केंद्र पहुंचे। भोपाल के मध्यस्थता केंद्र में कुल 49 लिव-इन विवाद दर्ज हुए, जिनमें से 17 मामलों में जोड़े उम्रदराज थे। वहीं इंदौर में भी कई मामले ऐसे सामने आए, जिनमें लंबे समय से साथ रह रहे पार्टनरों के बीच मतभेद पैदा हो गए। दिलचस्प बात यह है कि इन मामलों में से 13 में महिला या पुरुष अपने कानूनी जीवनसाथी से पूरी तरह अलग भी नहीं हुए थे। 

लिव-इन का चलन अब युवाओं तक सीमित नहीं
इन रिश्तों में शामिल लोग अलग-अलग पेशों से आते हैं। इनमें सरकारी विभागों में काम करने वाले, मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग, इंजीनियरिंग या फिटनेस क्षेत्र के लोग भी शामिल हैं। यह दिखाता है कि लिव-इन का चलन अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि समाज के हर वर्ग और उम्र में फैल रहा है। एक उदाहरण में इंदौर की 62 वर्षीय महिला और 65 वर्षीय पुरुष का मामला सामने आया। यह जोड़ा लगभग दस साल से साथ रह रहा था। पुरुष ने अपने परिवार को छोड़कर महिला के साथ लिव-इन में रहना शुरू किया था। 

बड़ी उम्र में रिश्ते में भरोसा बनाए रखना कठिन
शुरुआत में सब कुछ ठीक था। लेकिन, समय के साथ उनके बीच मतभेद बढ़ने लगे। महिला का कहना था कि रिटायरमेंट के बाद पुरुष की रोक-टोक और हस्तक्षेप बढ़ने लगा है, जिससे उसे अपनी स्वतंत्रता में कमी महसूस हो रही है। इसी कारण वह अब इस रिश्ते को खत्म करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उम्रदराज लिव-इन कपल्स के बीच विवाद का सबसे बड़ा कारण सामाजिक दबाव, असुरक्षा की भावना और पारिवारिक परिस्थितियां होती हैं। कई बार बच्चों या रिश्तेदारों को इस रिश्ते की जानकारी नहीं होती। 

नाते-रिश्तेदारों का हस्तक्षेप भी बढ़ाता है परेशानी
जब परिजनों-नाते-रिश्तेदारों को इसकी जानकारी होती है, तो वे विरोध करते हैं, जिससे संबंधों में तनाव बढ़ जाता है। इसके अलावा इस उम्र में लोगों की आदतें और जीवनशैली पहले से तय हो चुकी होती है, इसलिए एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाना कठिन हो जाता है। यह सच है कि प्रेम की भावना और साथ की जरूरत उम्र नहीं देखती, लेकिन लिव-इन जैसे रिश्तों में स्थिरता बनाए रखना उम्र बढ़ने के साथ और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए ऐसे रिश्तों में पारस्परिक समझ, सम्मान और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

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