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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले के बाद धार्मिक जगत में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।  

उज्जैन। प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से एक अहम खबर सामने आई है। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज ने अपने पद से हटने का निर्णय लिया है। उनके इस्तीफे की जानकारी सामने आते ही साधु-संतों के बीच हलचल तेज हो गई।महंत विनीत गिरी ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए बताया कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान हैं। इसी वजह से उन्होंने अपना त्यागपत्र दे दिया है। हालांकि, अब तक अखाड़े ने इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। 

6 साल पहले संभाली थी महंत की जिम्मेदारी
करीब छह वर्ष पहले उन्हें महंत की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परंपरा के अनुसार, अखाड़े के संतों ने उन्हें विधिवत सम्मान के साथ गद्दी पर बिठाया था। इसके बाद से ही वह महाकाल मंदिर में धार्मिक कार्यों का संचालन कर रहे थे और विभिन्न पूजा-पाठ की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। महंत के रूप में विनीत गिरी ने भस्म आरती में भस्म अर्पण करने की परंपरा निभाई। 

अखाड़े-मंदिर के बीच सेतु होते हैं गादीपति
बता दें महानिर्वाणी अखाड़ा देश के प्रमुख शैव संन्यासी अखाड़ों में से एक है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर, में कई धार्मिक कार्यों में अखाड़ों की भूमिका रहती है। विनीत गिरी महाराज को अखाड़े द्वारा महंत (गादीपति) के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें महाकाल मंदिर में कुछ विशेष धार्मिक जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। जिनका संबंध मंदिर की दैनिक और विशेष पूजा परंपराओं से था।

प्रकाश पुरी ने भी दिया था ऐसे ही इस्तीफा  
इसके अलावा, ओंकारेश्वर और रामेश्वर मंदिरों में भी पूजा की जिम्मेदारी उनके पास थी। इन धार्मिक कर्तव्यों को उन्होंने लंबे समय तक नियमित रूप से निभाया और अपनी सेवाएं दीं। इस पद पर पहले विराजमान महंत प्रकाश पुरी ने भी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था। उनके बाद मंदिर प्रबंधन ने कुछ बदलाव करते हुए भस्म आरती की जिम्मेदारी गणेश पुरी को सौंपी थी, जबकि अन्य पूजा कार्यों के लिए शासकीय पुजारियों को नियुक्त किया गया था।

अब आगे क्या, इस पर टिकी लोगों की निगाहें
विनीत गिरी वर्ष 2020 में अखाड़े का आधिकारिक पत्र लेकर उज्जैन पहुंचे थे, जिसे मंदिर प्रशासन को सौंपा गया था। इसके बाद मंदिर समिति ने बैठक कर उनके नाम को स्वीकृति दी और उन्हें महंत के रूप में जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनके इस्तीफे के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अखाड़ा इस पर क्या निर्णय लेता है। आने वाले समय में मंदिर की व्यवस्थाओं में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। 

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