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उज्जैन में ‘महाकाल: मास्टर ऑफ टाइम’ कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ। CM मोहन यादव और धर्मेंद्र प्रधान ने 700 करोड़ से ज्यादा प्रोजेक्ट्स शुरू किए।

मध्यप्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन में 'महाकाल- द मास्टर ऑफ टाइम' अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम तारामंडल परिसर में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में उज्जैन विज्ञान केंद्र का लोकार्पण हुआ। 701 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले उज्जैन सिंहस्थ बायपास 4 लेन मार्ग और 22.52 करोड़ रुपए की लागत से 'सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज' इकाई की विस्तार परियोजना का भूमिपूजन भी किया गया।

उज्जैन है विज्ञान की भी नगरी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ विज्ञान की भी नगरी है। उज्जैन की माटी में विज्ञान, गणित, खगोल और ब्रह्मांड चिंतन सदियों से विद्यमान है। उज्जैन काल गणना का केंद्र रहा है, जहां प्राचीन काल में सूर्य की छाया से समय नापने की कला विकसित हुई। प्राचीन भारतीय भूगोल के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच के वैश्विक मानक के अस्तित्व में आने से सदियों पहले शून्य देशांतर रेखा पावन नगरी उज्जैन से होकर गुजरती थी। जब पश्चिम में खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था तब उज्जैन के ज्योतिषी और विद्वान काल गणना कर नक्षत्रों की स्थिति बता रहे थे।

CM Mohan Yadav

उज्जैन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का दीप प्रज्ज्वलन

शिव हैं अनंत का प्रतीक
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है, लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं, जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता अर्थात ‘मास्टर ऑफ टाइम’ हैं। विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं, हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था।

उज्जैन विज्ञान केंद्र का लोकार्पण
उज्जैन विज्ञान केंद्र का लोकार्पण

अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि, उज्जैन वह स्थान है जहां अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और एक नई दृष्टि का जन्म होता है। भारत के जितने भी प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं - चाहे वह उज्जैन हो, काशी हो, कांची हो या पुरी धाम, सभी भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी ‘जीती-जागती प्रयोगशालाएं’ हैं, जहाँ विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय मिलता है।

केंद्रीय मंत्री श्री प्रधान ने महाकाल मंदिर के एक वैज्ञानिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए बताया कि वैशाख मास के पहले दिन से भगवान शिव के ऊपर मटके से निरंतर जल की धारा प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ग्रीष्मकाल की चुनौतियों का एक वैज्ञानिक समाधान और पर्यावरणीय प्रबंधन है। यह दर्शाता है कि हमारा समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के बदलावों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढालने की वैज्ञानिक समझ रखता था। भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और संतुलित जीवन प्रवाह हमेशा से केंद्र में रहा है।

विद्यार्थी विज्ञान मंथन की पुस्तिका का विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट, ब्रोशर एवं पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में विकसित बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गयी।

सिंहस्थ 2028 के लिए विकास कार्यों का भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने उज्जैन में मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाई ‘सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज’ की विस्तार परियोजना का भूमि-पूजन किया। वर्तमान में इस हेरिटेज इकाई में 19 कक्ष, रूफटॉप सहित 3 रेस्टोरेंट, पंचकर्म केंद्र एवं पुस्तकालय संचालित हैं। धार्मिक पर्यटन में लगातार हो रही वृद्धि और आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए 22.52 करोड़ रुपये की लागत से इसका विस्तार किया जाएगा। इस विस्तार के तहत 14 नए कक्ष, एक सुव्यवस्थित डॉर्मिटरी, परिसर को जोड़ने वाले कनेक्टिंग पाथवे तथा आकर्षक गार्डन एवं लैंडस्केपिंग विकसित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 701.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19.80 किमी लंबे उज्जैन सिंहस्थ बायपास (4-लेन) सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। इस परियोजना से लगभग 5 लाख लोगों एवं सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा। साथ ही 4-लेन मार्ग बनने से आवागमन और यातायात प्रबंधन सुगम होगा। मार्ग के 14 कि.मी. का 4-लेन उन्नयन एवं 5.8 कि.मी. का 4-लेन विस्तारीकरण किया जाना है, जो इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग के शांति पैलेस चौराहा से प्रारंभ होकर उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, उज्जैन-जावरा मार्ग तथा उज्जैन-गरोठ मार्ग को जोड़ते हुए उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 552-जी ग्राम सुरासा के समीप समाप्त होगा।

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