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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोम डिस्टिलरीज मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है और केस अब दूसरी बेंच को ट्रांसफर होगा। जानिए लाइसेंस निलंबन और फर्जी परमिट मामले की पूरी कहानी।

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सोम डिस्टिलरीज से जुड़ी याचिका पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा ने खुद को केस से अलग कर लिया। उन्होंने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिए कि यह प्रकरण किसी अन्य बेंच को स्थानांतरित किया जाए। हालांकि, न्यायाधीश ने अपने इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया। अदालत की कार्यवाही में किसी जज द्वारा स्वयं को अलग कर लेना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जिसे आमतौर पर निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अपनाया जाता है।

केस से दूरी बनाने का यह पहला मामला नहीं
यह पहला मौका नहीं है जब जस्टिस मिश्रा ने किसी चर्चित मामले से दूरी बनाई हो। इससे पहले वे भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़े अवैध खनन प्रकरण की सुनवाई से भी स्वयं को अलग कर चुके हैं। उस समय उन्होंने टिप्पणी की थी कि एक विशेष विषय पर चर्चा करने का प्रयास किया गया, इसलिए वे उस याचिका पर विचार नहीं करना चाहते। सोम डिस्टिलरीज मामले में अगली सुनवाई 26 फरवरी को निर्धारित की गई है, जहां नई बेंच इस पर विचार करेगी। करीब 20 दिन पहले रायसेन जिले में संचालित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लि. तथा मेसर्स सोम डिस्टिलरीज प्रा. लि.  के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे।

आबकारी विभाग ने निलंबित किए थे लाइसेंस 

लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई तत्कालीन आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने की थी। आदेश में उल्लेख किया गया कि कंपनी से जुड़े संचालकों, प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के खिलाफ इंदौर जिले की देपालपुर अपर सत्र न्यायालय में दर्ज एक आपराधिक प्रकरण के निर्णय के आधार पर यह कदम उठाया गया। हालांकि इंदौर खंडपीठ ने संबंधित आपराधिक अपीलों में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है, लेकिन दोषसिद्धि अभी भी प्रभावी मानी जा रही है।

विभाग ने कहा-निलंबन कोर्ट की अवमानना नहीं

आबकारी विभाग ने मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 31 के तहत लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई को पूरी तरह से वैध बताया है। आबकारी विभाग ने पने कदम को कानून के अनुरूप बताया और कहा कि इससे न्यायालय की अवमानना नहीं होती। यह विवाद 23 दिसंबर 2023 को न्यायालय पहुंचा था। इससे पहले कंपनी को 26 फरवरी 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। आरोप है कि नकली शराब परिवहन परमिट तैयार किए गए और अवैध रूप से शराब का परिवहन किया गया।

अब नई बेंच करेगी इस मामले की सुनवाई

र्ट ने इस मामले में उमाशंकर शर्मा, जीडी अरोरा, दिनकर सिंह, मोहन सिंह तोमर और दीनानाथ सिंह सहित कई व्यक्तियों को कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। जांच में यह भी सामने आया कि कई आरोपियों ने बड़ी संख्या में फर्जी परमिट तैयार किए थे। इसके बाद विभाग ने कंपनी के लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया। अब जब मामला दूसरी बेंच के समक्ष जाएगा, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है।  

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