सोहागपुर/जबलपुर। मध्यप्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व क्षेत्रों से चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां बाघों के बीच संघर्ष में एक शावक और एक बाघिन की मौत हो गई है। ये घटनाएं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) और कान्हा टाइगर रिजर्व में अलग-अलग स्थानों पर हुईं, जिसने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। वन अधिकारियों के अनुसार, दोनों मामलों में प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ है कि इन जानवरों की मौत प्राकृतिक संघर्ष के कारण हुई है। फिलहाल विस्तृत जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।
सतपुड़ा में शावक की संदिग्ध मौत
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मटकुली वन क्षेत्र में एक छोटे बाघ शावक का शव मिला। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और जांच शुरू की। क्षेत्र संचालक राखी नंदा के मुताबिक, मृत शावक की उम्र करीब चार महीने आंकी गई है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि शावक की मौत किसी बड़े बाघ के हमले में हुई हो सकती है। वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास के इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है।
कान्हा में बाघिन की मौत से हड़कंप
इसी तरह की एक और घटना कान्हा टाइगर रिजर्व के कन्हारी वन क्षेत्र में सामने आई, जहां एक वयस्क मादा बाघ का शव बरामद हुआ। इस सूचना के बाद पार्क प्रबंधन और वन अमला तुरंत मौके पर पहुंचा। घटनास्थल को सुरक्षित कर डॉग स्क्वायड की मदद से पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। इसके बाद पशु चिकित्सकों की टीम ने बाघिन के शव का परीक्षण किया।
संघर्ष में मौत होने की आशंका
प्राथमिक जांच के दौरान यह पाया गया कि बाघिन के शरीर के अंग सुरक्षित थे, जिससे अवैध शिकार (पोचिंग) की संभावना कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर अक्सर संघर्ष होते रहते हैं। माना जा रहा है कि इसी प्रकार के संघर्ष में बाघिन की जान गई हो सकती है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
इन दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग ने संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि जंगल में बाघों के बीच संघर्ष असामान्य नहीं है, लेकिन लगातार ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। टीम द्वारा इलाके में लगातार गश्त की जा रही है और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वन विभाग का मानना है कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं की गहन जांच और निगरानी जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके।










