भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नीदरलैंड्स के प्रतिष्ठित इरास्मस मेडिकल सेंटर, रॉटरडैम के विशेषज्ञों का एक प्रतिनिधिमंडल संस्थान पहुंचा। इस दौरे के दौरान उन्होंने एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ प्रो. डॉ. माधवानंद कर से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी। भविष्य में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की योजना है। खासतौर पर आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर सकारात्मक माहौल बना।
फार्माकोजीनोमिक्स पर विशेष जोर
बैठक के दौरान फार्माकोजीनोमिक्स और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे उभरते हुए क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया गया। फार्माकोजीनोमिक्स वह विज्ञान है, जिसमें मरीज के जीन के आधार पर दवाओं का असर समझा जाता है। इससे इलाज अधिक प्रभावी और सुरक्षित बनाया जा सकता है। प्रिसिजन मेडिसिन का उद्देश्य हर मरीज के लिए उसकी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार उपचार तय करना होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिकित्सा क्षेत्र का भविष्य है।
शोध सहयोग के लिए समझौते की दिशा
चर्चा के दौरान दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक और शोध सहयोग बढ़ाने के लिए एक आशय पत्र भी प्रस्तुत किया गया। इसे दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। इस सहयोग के तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान किया जा सकता है। इससे दोनों संस्थानों को वैश्विक स्तर पर शोध को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
10 करोड़ की परियोजना पर काम
इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट की लागत लगभग 10 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। एम्स भोपाल की ओर से इस परियोजना का नेतृत्व फार्माकोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शुभम अटल करेंगे। वे इस प्रोजेक्ट के प्रमुख अन्वेषक और नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। उनके साथ प्रो. बालकृष्णन एस., डॉ. जितेंद्र सिंह और प्रो. अशोक कुमार जैसे विशेषज्ञ भी इस शोध कार्य में सहयोग करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
इरास्मस मेडिकल सेंटर की टीम का नेतृत्व प्रो. पीटर जे. वान डेर स्मेक ने किया। उनके साथ प्रो. हरि शंकर शर्मा और लिंडा होडेलमैन्स भी इस दौरे में शामिल रहे। बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बातचीत हुई। कुल मिलाकर यह दौरा एम्स भोपाल के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने का एक अहम अवसर माना जा रहा है।










