भोपाल। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने प्रेस वार्ता के दौरान अपनी सदस्यता खत्म होने और हालिया सजा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे साधारण कानूनी कार्रवाई न मानते हुए एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र बताया। भारती ने कहा कि उन पर दबाव बनाने की कोशिश लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने कुछ नेताओं और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरा मामला उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने का प्रयास है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके बयान से राजनीतिक माहौल गर्मा गया। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में और खुलासे किए जा सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
70 करोड़ का प्रस्ताव और धमकी का आरोप
राजेंद्र भारती ने दावा किया कि उन्हें पार्टी बदलने के लिए भारी रकम का ऑफर दिया गया था। उनके मुताबिक, एक केंद्रीय मंत्री के करीबी व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा में शामिल होने और केस वापस लेने के बदले बड़ा पद देने का प्रस्ताव मिला। इसके साथ ही कथित तौर पर 70 करोड़ रुपये तक दिलाने की बात भी कही गई। भारती ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव ठुकराने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। उन्होंने कहा कि सही समय आने पर संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करेंगे।
मंत्री पर परिवार के अपमान का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारती ने एक कैबिनेट मंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने उनकी दिवंगत मां के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। भारती ने इसे व्यक्तिगत और असंवेदनशील व्यवहार बताया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहा है। ऐसे में इस तरह के बयान न केवल अनुचित हैं बल्कि सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले भी हैं। उन्होंने मंत्री पर गलत जांच रिपोर्ट तैयार करवाने का भी आरोप लगाया।
पुराना विवाद और कानूनी संघर्ष का जिक्र
भारती ने बताया कि उनका और एक वरिष्ठ नेता का विवाद काफी पुराना है। उनके अनुसार यह विवाद करीब 2008 से चला आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान अनियमितताएं हुई थीं, जिसकी शिकायत उन्होंने की थी। इसके बाद से उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार और कारोबार को भी निशाना बनाया गया। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वे अपने रुख पर कायम रहे और दबाव में नहीं आए।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल
इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बयानबाजी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आगे और तूल पकड़ सकता है। अगर आरोपों की जांच होती है, तो कई नए पहलू सामने आ सकते हैं। फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।










