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प्रदेश में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से 25 जिलों में फसलों को नुकसान की आशंका है। गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। प्रशासन ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है ताकि किसानों को राहत दी जा सके।

भोपाल। प्रदेश में पिछले तीन दिनों से मौसम ने अचानक करवट बदली है। तेज हवाओं, बारिश और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के कई जिलों में भारी वर्षा, आंधी और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। बीते 24 घंटों में भोपाल, रतलाम, मंदसौर, शाजापुर, धार, इंदौर, रायसेन, उज्जैन, सागर और छतरपुर सहित अनेक जिलों में वर्षा हुई है और कुछ स्थानों पर ओले भी गिरे हैं। प्रशासन ने फसलों को हुए नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया है, ताकि किसानों को उचित मुआवजा दिया जा सके। 

गेहूं की फसल में सबसे अधिक हानि
तेज हवाओं का सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर देखने को मिला है। रतलाम, शाजापुर और उज्जैन जैसे क्षेत्रों में गेहूं की बालियां झुक गई हैं या जमीन पर गिर गई हैं। फसल के इस तरह आड़ी हो जाने से दाने की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है। यदि मौसम जल्दी सामान्य नहीं हुआ तो किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। लगातार तीन दिनों से प्रदेश के लगभग आधे हिस्से में मौसम अस्थिर बना हुआ है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 25 जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। 

जिला प्रशासन ने शुरू किया सर्वेक्षण  
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राजस्व विभाग की टीमें खेतों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन कर रही हैं, ताकि आगे मुआवजे या राहत से जुड़ा निर्णय लिया जा सके। प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। राजधानी भोपाल में भी गुरुवार देर रात से हल्की वर्षा का सिलसिला शुरू हुआ, जो शुक्रवार सुबह तक जारी रहा। बादलों की वजह से दिनभर धूप नहीं निकल सकी। हालांकि रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

अगले दो दिन मौसम साफ रहने की उम्मीद
बड़े शहरों में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जबकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में यह 12 डिग्री या उससे अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 21 फरवरी को वर्षा की संभावना नहीं है और दिन में धूप निकल सकती है। 22 फरवरी को भी मौसम साफ रहने की उम्मीद है तथा किसी भी जिले के लिए बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। यदि पूर्वानुमान सही साबित होता है तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन जो नुकसान हो चुका है, उसकी भरपाई प्रशासनिक सहायता पर निर्भर करेगी। 

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