मध्यप्रदेश के 16 नगर निगमों में जलापूर्ति पाइपलाइन की जांच में 62,528 से अधिक लीकेज सामने आए हैं। सबसे ज्यादा लीकेज भोपाल में पाए गए। कई ट्यूबवेल का पानी भी दूषित मिला, जिससे पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भोपाल। प्रदेश के कई बड़े शहरों में पानी की आपूर्ति व्यवस्था में अनेक गंभीर खामियां मैजूद हैं। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से मौत के बाद सरकार और प्रशासन सक्रिय हो हुए और नगर निगम क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति लाइनों की जांच कराई। जांच में सामने आया कि प्रदेश के 16 नगर निगमों की जलापूर्ति लाइनों में 62,528 से अधिक लीकेज मौजूद थे। इससे पता चलता है कि अनेक स्थानों पर पाइप लाइनें जर्जर हो चुकी हैं। प्रशासन ने दावा किया है कि इनमें से अधिकांश लीकेज ठीक कर दिए गए है, ताकि भविष्य में भागीरथपुरा जैसा मामला नहीं हो।  

भोपाल में पाए गए सबसे ज्यादा लीकेज
इस जांच में सबसे ज्यादा लीकेज राजधानी भोपाल में पाए गए हैं। जांच के दौरान भोपाल में लगभग सात हजार से अधिक स्थानों पर पाइप लाइन से पानी रिस रहा था। इस मामले में, इंदौर दूसरे स्थान पर रहा, जहां करीब 4800 से ज्यादा लीकेज पाए गए हैं। इन दोनों शहरों के अलावा अन्य नगर निगमों में भी बड़ी संख्या में पाइप लाइनों में रिसाव देखने को मिला है।  विशेषज्ञों का मानना है कि जब पानी की पाइप लाइनों में दरार या रिसाव होता है और उसके आसपास सीवेज लाइन होती है, तो गंदा पानी पाइप के अंदर पहुंच सकता है। यह किसी बड़ी महामारी का रूप ले सकता है।  

भोपाल में गंदे पानी से जुड़ी 2172 शिकायतें दर्ज  
भोपाल के पुराने शहर के कई इलाकों में अब भी लोगों को बदबूदार और गंदा पानी मिलने की शिकायतें मिल रही हैं। बुधवारा, इतवारा, भोपाल टॉकीज और रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक कई बार जल सुनवाई कार्यक्रमों में गंदे पानी के नमूने लेकर पहुंचे हैं। हालांकि नगर निगम का कहना है कि लीकेज को लगातार ठीक किया जा रहा है और स्थिति में सुधार लाने की कोशिश की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार भोपाल में अब तक गंदे पानी से जुड़ी 2172 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

29 ट्यूबवेलों का पानी भी दूषित पाया गया
जांच के दौरान प्रदेश में मौजूद हजारों ट्यूबवेलों की भी पड़ताल की गई। राज्य में करीब साढ़े 13 हजार से ज्यादा ट्यूबवेल हैं, जिनमें से लगभग सात हजार की जांच की गई। परीक्षण के दौरान 29 ट्यूबवेलों का पानी दूषित पाया गया। इनमें सबसे ज्यादा 14 ट्यूबवेल सागर नगर निगम क्षेत्र में खराब पाए गए। इसके अलावा भोपाल में 4 तथा इंदौर और जबलपुर में 5-5 ट्यूबवेलों के पानी में गड़बड़ी पाई गई। ऐसे सभी ट्यूबवेलों को बंद कर दिया गया है ताकि लोगों तक दूषित पानी न पहुंचे।

केमिस्ट 72, ज्यादातर भोपाल में कार्यरत  
प्रदेश में कुल 318 नगरीय निकाय हैं, जिनमें करीब पांच करोड़ लोग रहते हैं और उन्हें नियमित रूप से नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद जल गुणवत्ता की जांच करने वाले विशेषज्ञों यानी कैमिस्टों की संख्या काफी कम है। पूरे प्रदेश में केवल 72 कैमिस्ट कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत भोपाल में ही तैनात हैं। इस कारण कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच करना संभव नहीं होता है।

सीवर-पेयजल लाइनें अलग-अलग डाली जाएं
सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। भविष्य में सीवेज लाइन और पानी की पाइप लाइन को एक-दूसरे से दूरी पर डालने के निर्देश दिए गए हैं ताकि गंदे पानी के मिलावटी होने की संभावना कम हो सके। इसके अलावा बहुत पुरानी पाइप लाइनों को धीरे-धीरे बदलने की योजना भी बनाई गई है। लोहे की पुरानी पाइपों की जगह अब प्लास्टिक की आधुनिक पाइप लाइन लगाने पर जोर दिया जा रहा है। नालों या जलभराव वाले क्षेत्रों से पाइप लाइन निकालने की व्यवस्था भी बदली जाएगी। नगर निकायों को 15 मार्च तक पुरानी पाइप लाइनों का सर्वे पूरा कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।