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मध्यप्रदेश में टीईटी विवाद के बीच सरकार ने नरम रुख अपनाया है। शिक्षकों के विरोध के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पर विचार किया जा रहा है और अधिकारी कानूनी राय लेने दिल्ली जाएंगे।

भोपाल। मध्यप्रदेश में  शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद में अब सरकार का रुख कुछ नरम पड़ा है। लगातार विरोध और शिक्षकों के आंदोलनों के बीच राज्य सरकार ने इस मामले में कानूनी विकल्प तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बुधवार को वल्लभ भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद यह तय किया गया कि इस विषय में केंद्र सरकार के शीर्ष विधि अधिकारी से राय ली जाएगी।

दिल्ली में ली जाएगी कानूनी सलाह 
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द इस मामले में कानूनी परामर्श प्राप्त करें। सूत्रों के अनुसार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और विधि विशेषज्ञ दिल्ली जाकर सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकार यह समझना चाहती है कि कानूनी रूप से इस फैसले को चुनौती देने के कितने विकल्प मौजूद हैं।

शिक्षकों के  विरोध की वजह से बना दबाव 
राज्यभर में शिक्षक संगठनों द्वारा टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि पहले से कार्यरत शिक्षकों पर यह नियम लागू करना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि इससे उनकी नौकरी और भविष्य पर संकट खड़ा हो सकता है। इसी कारण वे सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग कर रहे हैं।

डीपीआई के आदेश के बाद बढ़ा विवाद
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कदम के बाद मध्यप्रदेश सरकार पर भी जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है। अन्य राज्यों की सक्रियता से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संचालक लोक शिक्षण (डीपीआई) ने टीईटी को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही थी। इसके बाद से ही शिक्षकों में असंतोष पैदा हो गया। 

सबसे बड़ा सवाल-क्या होगी आगे की दिशा? 
शिक्षकों के असंतोष क बीच अब सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह शिक्षकों के हित और न्यायिक आदेश के बीच संतुलन कैसे बनाए।  अब सॉलिसिटर जनरल की राय के बाद ही इस मामले में राज्य सरकार आगे की रणनीति तय करेगी। कुल मिलाकर, टीईटी से जुड़ा यह मामला आगे भी चर्चा में बना रहने वाला है। माना जा रहा है कि यह विवाद आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।

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