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बुरहानपुर के बोरसर गांव में गाली देने पर 500 जुर्माना या 2 घंटे सफाई का नियम, लाइब्रेरी और ‘मां के नाम पेड़’ पहल भी शुरू।

मध्यप्रदेश। एमपी का एक गांव संस्कारों के मामले में देश के लिए एक मिसाल बन रहा है। एक ओर ओटीटी प्लैटफॉर्म्स और कई वेब सीरीज में गालियों को ग्लैमराइज किया जा रहा वहीं ये गांव बच्चों को नए तरीके से संस्कार सिखा रहा है। इस गांव की कहानी हर किसी के जुबां पर है। गांव में नियम बनाया गया है कि, अगर कोई व्यक्ति गाली देता है तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगेगा। इतना ही नहीं अगर कोई जुर्माना न दे पाया तो उसे झाड़ू लगाकर अपनी गलती की सजा भुगतनी होगी।

सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
बात मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले से सटे गांव बोरसर की हो रही है। सामाजिक सुधार की दिशा में उठाया गया गांववासियों का यह कदम न केवल एक अच्छी पहल है बल्कि समाज के लिए एक अच्छा उदहारण भी है। ग्राम पंचायत ने गली देने वालों के खिलाफ सख्त नियम बनाए हैं। इन नियमों का उद्द्देश्य गांव में सद्भावना, सम्मान और संस्कारों को बनाए रखना है।

गाली देना करना होगा बंद
सार्वजनिक स्थानों पर ग्राम पंचायत ने पोस्टर्स लगवाए हैं। इन पोस्टर्स में स्पष्ट कहा गया है कि, सार्वजनिक स्थान पर गाली दी तो पांच सौ रुपए का जुर्माना या झाड़ू लगाकर श्रमदान करना होगा। अगर ये सजा नहीं चाहिए तो गाली देना बंद करना होगा।

अभद्र भाषा के उपयोग पर रोक
नए नियमों के प्रति गांव वालों को जागरूक करने के लिए पंचायत प्रतिनिधि घर-घर गए हैं। लोगों को समझाया गया है कि, किसी भी तरह का विवाद होने पर अभद्र भाषा का उपयोग न किया जाए। नियमों का उल्लंघन करने पर सजा भुगतनी पड़ेगी।

पंचायत भवन में लाइब्रेरी की व्यवस्था
बच्चों की रूचि पढ़ाई में आए इसके लिए पंचायत भवन में लाइब्रेरी और वाचनालय शुरू किया गया है। यह व्यवस्थाएं पूरी तरह फ्री है। इस पहल से लोगों को शिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मां के नाम पेड़
इस गांव में एक अन्य सकारात्मक पहल की गई है। इसके अनुसार अगर गांव में किसी के घर पर कोई शुभ कार्यक्रम होता है तो मां के नाम पेड़ अवश्य लगाए जाने चाहिए। इससे लोगों में प्रकृति के प्रति स्नेह बढ़ेगा।

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