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मध्य प्रदेश में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ शिक्षकों ने प्रदेशभर में प्रदर्शन का ऐलान किया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नया नियम लागू करना अन्यायपूर्ण है।

भोपाल। प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों ने टीचर्स इलीजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) को लेकर राज्य सरकार के हालिया आदेश का विरोध करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में शुक्रवार को पूरे प्रदेश में शिक्षक कलेक्टर कार्यालयों के सामने एकत्र होकर प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। यह आंदोलन स्टेट गवर्नमेंट टीचर्स आर्गनाइजेशन के आह्वान पर आयोजित किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा जारी आदेश से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में असंतोष पैदा हो गया है।

पूरे प्रदेश में किया जाएगा विरोध प्रदर्शन
दरअसल, लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से एक निर्देश जारी किया गया है, जिसमें सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कहा गया है। इसी आदेश के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। जानकारी के मुताबिक राज्य के विभिन्न जिलों में शिक्षक जिला मुख्यालयों पर इकट्ठा होकर अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे और प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाएंगे।

सालों बाद सेवा शर्तों में बदलाव ठीक नहीं
शिक्षकों के संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जो पिछले 20 से 27 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी जब टीईटी परीक्षा अनिवार्य नहीं थी। उनका तर्क है कि इतने वर्षों बाद सेवा शर्तों में बदलाव करना उचित नहीं है और इससे शिक्षकों के भविष्य पर अनिश्चितता का खतरा पैदा हो सकता है। संगठन ने सरकार से इस आदेश को तुरंत निरस्त करने और पूरे मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

असंतोष टीईटी के मुद्दे तक सीमित नहीं
शिक्षकों में असंतोष केवल टीईटी के मुद्दे तक सीमित नहीं है। इससे पहले भी भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर शिक्षकों ने 26 फरवरी को विरोध प्रदर्शन किया था। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में नई भर्तियों की प्रक्रिया बहुत धीमी गति से चल रही है, जिससे योग्य उम्मीदवार लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों के अनुसार मध्य प्रदेश में कक्षा-2 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। इसके तहत पात्रता परीक्षा 2023 में आयोजित की गई थी, जबकि चयन परीक्षा अप्रैल 2025 में हुई। 

चयन सूची जारी, नियुक्ति का आदेश नहीं
इसके बाद सितंबर 2025 में चयन सूची भी जारी कर दी गई, लेकिन अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं किए गए हैं। इस कारण उम्मीदवारों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आगे आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। उनका उद्देश्य केवल अपने अधिकारों की रक्षा करना और सेवा शर्तों में अचानक किए जा रहे बदलावों के खिलाफ आवाज उठाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को किसी तरह की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

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