जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के खिलाफ चल रही अवमानना कार्रवाई को निरस्त कर उन्हें बड़ी राहत दी है। जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी मानते हुए आयुक्त को दोषी ठहराया गया था।
हालांकि, जिस मूल रिट याचिका से यह मामला जुड़ा है, उसकी सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। यह पूरा मामला एक निजी कंपनी, मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड, की याचिका से संबंधित है।
सिंगल बेंच ने माना कानून की अवहेलना की
कंपनी का आरोप था कि नगर निगम ने उसकी संपत्ति के सामने वाले हिस्से को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए ध्वस्त कर दिया। इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने माना था कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया और इसी आधार पर निगम आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। बाद में इस आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने पूरे मामले पर विचार किया।
साबित नहीं हुआ अवमानना का दावा
नगर निगरम आयुक्त संस्कृति जैन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि अवमानना तभी मानी जाती है जब अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया गया हो। उनका कहना था कि याचिका में ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि कोर्ट के निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना की गई। नगर निगम की तरफ से यह भी तर्क रखा गया कि संबंधित निर्माण अवैध था। निगम के अनुसार 7 नवंबर 2024 को दी गई अनुमति बाद में रद्द कर दी गई थी।
मूल विवाद की याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी
इसके बाद 14 मई 2025 को नियमानुसार नोटिस जारी किया गया और प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। इसलिए इसे अदालत के आदेश की अवमानना नहीं माना जा सकता। इन सभी दलीलों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का अवमानना संबंधी आदेश रद्द कर दिया।
हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि मूल विवाद से जुड़ी रिट याचिका पर सुनवाई सिंगल बेंच में जारी रहेगी और उस पर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा। इस फैसले से फिलहाल निगम आयुक्त को राहत मिल गई है, लेकिन संपत्ति विवाद का मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में बना रहेगा।