भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के दौरान नकल की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले जहां चंबल क्षेत्र को नकल के मामलों के लिए 'कुख्यात' माना जाता था, अब स्थिति यह है कि राजधानी भोपाल भी ऐसे मामलों में लगभग बराबरी पर पहुंचता दिख रहा है।
यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। हाल ही में 12वीं कक्षा के केमिस्ट्री और इतिहास सहित अन्य विषयों की परीक्षाओं के दौरान एक ही दिन में कई जिलों में नकल के प्रकरण दर्ज किए गए।
आधुनिक तकनीक का सहारा लेने लगे नकलची
मुरैना, सागर और भोपाल में तीन-तीन मामले सामने आए, जबकि रीवा में एक घटना दर्ज हुई। जांच के दौरान यह पाया गया कि परीक्षार्थी पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी सहारा ले रहे हैं।
छोटे-छोटे कागजों पर लिखी सामग्री छिपाकर लाना, हाथों या कपड़ों पर उत्तर लिखना, जूतों और मोजों में नोट्स रखना जैसे पुराने तरीके तो हैं ही, अब ब्लूटूथ ईयर डिवाइस और बाहरी व्यक्तियों की मदद से हल कराने जैसे नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। कुछ मामलों में वॉशरूम का उपयोग कर नकल करने की कोशिश भी पकड़ी गई।
नकल के लिए पहले चर्चा में रहते थे चंबल-भिंड
चंबल क्षेत्र के भिंड और मुरैना जिले लंबे समय से संगठित नकल और पेपर लीक की घटनाओं के कारण चर्चा में रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में भी ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2021 में चंबल क्षेत्र में 48 मामले दर्ज हुए थे, जबकि भोपाल में 19। जबकि 2025 आते-आते यह अंतर काफी कम हो गया और चंबल में 36 तथा भोपाल में 34 प्रकरण दर्ज किए गए।
इससे स्पष्ट होता है कि समस्या अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। परीक्षा केंद्रों पर फ्लाइंग स्क्वॉड और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बावजूद नकल की घटनाएं पूरी तरह रुक नहीं पाई हैं।
निगरानी बढ़ने से मामलों का हो रहा खुलासा
सिस्टम फेल होने की बात अधिकारी स्वीकार नहीं करते। मंडल के अधिकारियों का कहना है कि निगरानी बढ़ने की वजह से इन मामलों का खुलासा हो रहा है। दोषी छात्रों के खिलाफ परीक्षा निरस्त करने और एफआईआर दर्ज करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
स्थिति को सुधारने के लिए अब एआई आधारित लाइव मॉनिटरिंग, बाहरी जिलों से पर्यवेक्षक तैनात करना, जैमर की अनिवार्यता और संदिग्ध केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। कुल मिलाकर बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त कदम जरूरी माने जा रहे हैं, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।