भोपाल। इजराइल-ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर अब मध्य प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में भी साफ दिखने लगा है। कच्चे माल की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक उछाल आ गई है, जबकि परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत भी 5 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर उत्पादन, सप्लाई चेन और बाजार पर पड़ रहा है। मध्य प्रदेश की औद्योगिक इकाइयां भी इसके प्रभाव से अछूती नहीं रह गई हैं। बढ़ती लागत और कच्चे माल की अनिश्चित उपलब्धता के चलते कई उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।
फार्मा सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
कुछ इकाइयों में कामकाज धीमा पड़ गया है, तो कई जगह दो शिफ्ट की बजाय एक शिफ्ट में काम हो रहा है। करीब 10-15 %फैक्ट्रियों ने उत्पादन क्षमता घटा दी है। यदि स्थिति लंबी चली, तो कुछ इकाइयों में बंदी की नौबत आ सकती है। संकट का सबसे ज्यादा प्रभाव दवा उद्योग पर पड़ा है। दवाओं के कच्चे पदार्थों के दाम बढ़ रहे हैं। पैरासिटामोल पाउडर की कीमत में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। ग्लिसरीन और अन्य केमिकल्स भी महंगे हो गए हैं, जिससे दवाओं का उत्पादन खर्च बढ़ रहा है।
उद्योगों पर पड़ रही है दोहरी मार
इंदौर और पीथमपुर, सांवेर रोड और पालदा जैसे आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में सैकड़ों उद्योग संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या मिडिल ईस्ट देशों से कच्चा माल मंगाती है। मौजूदा हालात में बहरीन, कतर और सऊदी अरब से सप्लाई बाधित हुई है। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे चीन और यूरोप से आयात पर असर पड़ा है। इन दिनों उद्योगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। कुछ जगह कच्चा माल मिल नहीं रहा, तो कहीं इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो गई है।
संकट का एक्सपोर्ट पर पड़ा असर
प्लास्टिक, केमिकल और मेटल इंडस्ट्री में उपयोग होने वाले इनपुट महंगे होने से लागत बहुत बढ़ गई है। गैस की कमी से फार्मा कंपनियों में इंजेक्शन निर्माण भी प्रभावित हो रहा है। राज्य के कुल निर्यात में इंदौर का हिस्सा 40 से 50% है। मौजूदा हालात में यहां से ऑर्डर भेजने में मुश्किल आ रही है। कंटेनर की कमी, भाड़े में 4-5 गुना वृद्धि और बीमा की दिक्कतों ने व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। समुद्री रास्तों में जोखिम बढ़ने से कंपनियां शिपमेंट को लेकर सतर्क हो गई हैं।