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भोपाल के जीएमसी में सुपर स्पेशियलिटी भर्ती विज्ञापन विवादों में घिरा। असिस्टेंट प्रोफेसर पदों का विवरण गायब और भर्ती प्रक्रिया को आंतरिक रखने पर उठे सवाल। और जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।

Bhopal News भोपाल। स्थानीय गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में सुपर स्पेशियलिटी भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यह विज्ञापन जीएमसी में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए जारी किया गया है। इस विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। भर्ती की प्रक्रिया भी पूरी तरह से आंतरिक रखी गई है। इस विज्ञापन पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह है कि जीएमसी प्रशासन इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है।

असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर अस्पष्टता 
विज्ञापन में बताया गया है कि भर्ती तीनों श्रेणियों-प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर-के पदों पर की जाएगी। हालांकि, जहां प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों की संख्या स्पष्ट रूप से दी गई है, वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की संख्या या रिक्तियों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इस कारण इसे बड़ी चूक माना जा रहा है। 

इन पदों पर की जानी है भर्तियां 
विज्ञापन के अनुसार, कुल 6 पद प्रोफेसर के लिए और 3 पद एसोसिएट प्रोफेसर के लिए निर्धारित किए गए हैं। ये नियुक्तियां बाल रोग (पेडियाट्रिक्स) विभाग की सुपर स्पेशियलिटी शाखाओं में की जानी हैं। प्रोफेसर के पद स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी), पेडियाट्रिक्स, पेडियाट्रिक्स (कार्डियोलॉजी), पेडियाट्रिक्स (न्यूरोलॉजी), पेडियाट्रिक्स (नियोनेटोलॉजी) और ऑर्थोपेडिक्स में भरे जाएंगे। वहीं एसोसिएट प्रोफेसर के पद पेडियाट्रिक्स (कार्डियोलॉजी), न्यूरोलॉजी और नियोनेटोलॉजी में होंगे।

जीएमसी की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल 
इस भर्ती प्रक्रिया को केवल जीएमसी,भोपाल तक सीमित रखा गया है। जबकि यह सीधी भर्ती है, जिसे सामान्यतः सभी योग्य उम्मीदवारों के लिए खुला होना चाहिए। इस वजह से आशंका जताई जा रही है कि यह प्रक्रिया आंतरिक स्तर पर ही सीमित रह सकती है और अन्य मेडिकल कॉलेजों के उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पाएगा।

यह जीएमसी की बड़ी चूक: सोनी
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य आकाश सोनी ने इसे डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) और जीएमसी, भोपाल की बड़ी चूक बताया है। उनका कहना है कि विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों और रिक्तियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए था, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

कॉलेज प्रशासन ने रखा अपना पक्ष 
इस पूरे विवाद पर जीएमसी की डीन डॉ. कविता सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में भर्ती प्रक्रिया आंतरिक होगी। यदि इसके बाद भी पद खाली रह जाते हैं, तो इन्हें बाहरी उम्मीदवारों के लिए खोला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जीएमसी के भीतर कई लोग लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए पहले उन्हें अवसर दिया जा रहा है।

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