इंदौर के बीपीसीएल डिपो में 129 करोड़ रुपए का बड़ा फ्यूल घोटाला सामने आया है। आरोपियों ने तकनीकी खामी का फायदा उठाकर बिना भुगतान पेट्रोल-डीजल लिया। जानिए कैसे हुआ यह पूरा खेल और जांच में क्या सामने आया।

इंदौर। स्थानीय भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) के मांगल्या डिपो में एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है, जिसकी राशि करीब 129.55 करोड़ रुपए बताई जा रही है। यह मामला कंपनी के फ्लीट कार्ड सिस्टम और लॉयल्टी ऐप से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में इंदौर के 7 व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि इन लोगों ने तकनीकी खामी का फायदा उठाकर बिना भुगतान किए ईंधन हासिल किया। इस खुलासे के बाद तेल कंपनियों की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

तकनीकी खामी का उठाया गया फायदा 
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बीपीसीएल के पेमेंट गेटवे और ऐप में मौजूद एक सिस्टम गड़बड़ी का फायदा उठाया। इस खामी के कारण बिना बैंक खाते से पैसा कटे ही ईंधन खरीदा जा सकता था। फ्लीट कार्ड आमतौर पर ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों के लिए जारी किए जाते हैं। इनके जरिए ड्राइवर बिना नकद भुगतान के पेट्रोल-डीजल भरवा सकते हैं और राशि सीधे कंपनी के खाते से कटती है। इस मामले में असल भुगतान कंपनी तक पहुंच ही नहीं रहा था।

लॉयल्टी ऐप और वॉलेट सिस्टम का प्रयोग 
बीपीसीएल ने अपने ग्राहकों के लिए एक लॉयल्टी ऐप के माध्यम से डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू की थी। इसमें यूजर्स अपने वॉलेट को नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड के जरिए रिचार्ज कर सकते थे। रिचार्ज के बाद वही बैलेंस देशभर के पेट्रोल पंपों पर उपयोग किया जा सकता था। आरोपियों ने इसी सिस्टम में हेरफेर कर फर्जी बैलेंस दिखाना शुरू किया। इससे वे बिना असली भुगतान के बार-बार ईंधन लेते रहे।

संदिग्ध ट्रांजैक्शन से खुला मामला 
31 मार्च 2023 को पेमेंट गेटवे कंपनी की रिस्क टीम ने कुछ असामान्य ट्रांजैक्शन की जानकारी दी। जांच में पाया गया कि 1093 ग्राहकों के वॉलेट में कुल 129 करोड़ रुपए का बैलेंस दिख रहा था। लेकिन कंपनी के बैंक खातों में उतनी रकम जमा नहीं हुई थी। यह बड़ा अंतर सामने आने के बाद BPCL ने तुरंत खातों को ब्लॉक किया। इसके बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की गई।

फर्जी रिचार्ज एंट्री से चलता रहा खेल 
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने सिस्टम में फर्जी रिचार्ज दिखाकर वॉलेट बैलेंस बढ़ाया। उन्हें पता था कि उनके खातों से कोई पैसा नहीं कट रहा है। इसके बावजूद वे लगातार पेट्रोल और डीजल भरवाते रहे। कंपनी द्वारा रकम लौटाने के लिए कहने पर भी उन्होंने भुगतान नहीं किया। इस आधार पर पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

अन्य लोगों की भूमिका की जांच
फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है। साथ ही तकनीकी खामी कैसे बनी और इतनी बड़ी राशि तक मामला कैसे पहुंचा, इसकी भी जांच हो रही है। यह मामला डिजिटल भुगतान प्रणाली की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।