इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में बैंक लोन घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आर्थिक अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने एक और मामले का खुलासा करते हुए फर्जी कागजात के आधार पर करीब 33 लाख रुपए का लोन हासिल करने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस केस में सिर्फ लोन लेने वाले ही नहीं, बल्कि बैंक के जिम्मेदार अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं। पिछले लगभग 15 महीनों में यह बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा 11वां मामला सामने आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमारे वित्तीय संस्थानों में निगरानी प्रक्रिया कितनी कमजोर है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जांच में यह बात सामने आई है कि कई मामलों में बैंक के अधिकारी नियमों को नजरअंदाज कर लोन मंजूर कर रहे थे। आरोप है कि जिन संपत्तियों को गिरवी रखकर लोन दिया गया, वे पहले से ही किसी अन्य बैंक में बंधक थीं या उनकी वास्तविक कीमत से कहीं ज्यादा मूल्यांकन दिखाया गया। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं की और लोन स्वीकृत कर दिया। इस मामले में पैनल वकील और मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट भी भ्रामक पाई गई, जिस पर भरोसा कर बैंक ने बड़ा फैसला ले लिया।
एक दर्जन शिकायतों की जांच जारी
ईओडब्ल्यू के पास ऐसे करीब एक दर्जन और मामलों की शिकायतें लंबित हैं, जिनकी जांच जारी है। इनमें बिना पर्याप्त गारंटी के लोन देना, पहले से बेची जा चुकी संपत्ति को गिरवी दिखाना और कम कीमत की संपत्ति को ज्यादा बताकर कर्ज मंजूर कराने जैसे आरोप शामिल हैं। बीते एक साल में विभिन्न बैंकों से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आ चुके हैं, जिनमें कई बड़े बैंक भी शामिल हैं।
एक शिकायत पर सामने आया मामला
यह मामला केनरा बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर आनंद टोटड की शिकायत के बाद सामने आया। आरोप है मेसर्स अबू रोडलाइंस के संचालक करामत खान और अन्य ने 2017 में सिंडीकेट बैंक (वर्तमान में केनरा बैंक) नंदानगर शाखा से पहले 10 लाख का लोन लिया। इसके बाद लोन सीमा बढ़ाने के लिए मकान नंबर 435-ए के फर्जी दस्तावेज बैंक में जमा किए। बिना पूरी जांच बैंक अधिकारियों ने 33 लाख का अतिरिक्त लोन मंजूर कर दिया। जांच में सामने आया है कि जिस संपत्ति के आधार पर लोन दिया गया, वह पहले से ही इंडियन बैंक में गिरवी थी। बैंक ने 2021 में उसकी नीलामी भी कर दी थी।
आरोपियों पर लगाई गईं सख्त धाराएं
इस मामले में प्रोपराइटर, मेसर्स अबू रोडलाइंस के करामत खान, संपत्ति गिरवी रखने वाले मोहम्मद रफीक, तत्कालीन ब्रांच मैनेजर जतिन गुप्ता, तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर कमलेश दरवानी, इंजीनियर सुनील जैन, मूल्यांकनकर्ता जावेद खान और मोहम्मद इरफान खान को आरोपी बनाया गया है। इन पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़ी विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। यह पूरा घटनाक्रम यह दिखाता है कि बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की कितनी जरूरत है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने वित्तीय संस्थाओं की साख पर सवाल खड़े किए हैं।