भोपाल। होली को आपसी मनमुटाव भुलाकर रिश्तों को फिर से जोड़ने वाला पर्व माना जाता है। होली के त्यौहार ने इस बार कई टूटने के कगार पर जा पहुंचे रिश्तों को एक बार फिर करीब लाने का काम किया है। होली से पहले के सप्ताह में भोपाल और इंदौर के फैमिली कोर्ट में कुल 16 मामलों में समझौते कराए गए। भोपाल में 9 और इंदौर में 7 परिवारों ने विवाद खत्म कर साथ रहने का निर्णय लिया। समझौते के बाद अब ये परिवार लंबे समय बाद इस बार एक साथ होली मना रहे हैं।
मध्यस्थता केंद्र ने निभाई अहम भूमिका
इस पुनर्मिलन में मध्यस्थता केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। एक मामला तो ऐसा था जो पांच साल पहले होली के दौरान ही शुरू हुआ था। और संयोग देखिए, यह विवाद अंततः इसी त्योहार से पहले सुलझा। भारतीय समाज में त्योहार केवल समाजिक उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का एक एक अहम अवसर भी साबित होते हैं।
जब त्योहार पर लोग निकट आते हैं तो उनके मन की गांठें खुलने लगती हैं और अंतत: वे समाधान की ओर बढ़ने को तरजीह देते हैं। मध्यस्थता केंद्र की संचालक प्रतिभा राजगोपाल के अनुसार, हम कानूनी पेचीदगियों से ज्यादा भावनात्मक पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।
जीजा-साली के मजाक से तलाक की नौबत
एक उदाहरण शिवाजी नगर के एक परिवार का है। उस घर एक बेटी की शादी इंदौर में हुई थी। पहली होली पर वह मायके आई तो वहां होने वाली जीजा-साली के सामान्य मजाक को छोटे दामाद ने गलत समझ लिया और नाराज होकर रिश्ता खत्म करने पर उतर आया।
उसने पैतृक संपत्ति को लेकर भी आपत्ति जताई और मामला अदालत तक जा पहुंचा। तीन साल तक विवाद चलता रहा। बाद में बड़ी बहन की पहल पर मध्यस्थता केंद्र में बातचीत हुई। समझाने के बाद गलतफहमी दूर हुई और वे फिर साथ रहने को राजी हो गए। दोनों परिवार इंदौर में होली मना रहे हैं।
सास-बहू के झगड़े ने तलाक के करीब पहुंचाया
भोपाल के ही एक अन्य मामले में सास-बहू के विवाद ने एक दंपति के रिश्ते को तलाक के कगार पर ला दिया था। पति अपनी मां और पत्नी दोनों के प्रति जिम्मेदारी निभाना चाहता था, लेकिन परिस्थितियों ने दूरी बढ़ा दी।
नौ साल तक अलग रहने के बाद पिछले वर्ष मां के निधन के बाद पति ने पत्नी को वापस लाने का प्रयास किया। पत्नी ने असहमति जताई, लेकिन काउंसलिंग और समझाइश के बाद दोनों ने अपने 11 वर्षीय बेटे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए साथ रहने का निर्णय लिया।









