भोपाल। अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की उप नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने की घोषणा ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बजट सत्र के दौरान अचानक लिए गए इस निर्णय के बाद कई तरह की अटकलें लग रही थीं। अब कटारे ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। विधानसभा पहुंचे कटारे ने मीडिया को बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस पद से मुक्त करने की इच्छा जताई है। यह कोई प्रचार या दबाव की रणनीति नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत भावना थी, जिसे उन्होंने पार्टी के उचित मंच पर रखा।
इस्तीफे पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर
हेमंत कटारे ने अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, वह पार्टी के फैसले का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके इस कदम के पीछे पार्टी से नाराजगी नहीं, बल्कि विधानसभा की कार्यप्रणाली को लेकर निराशा है। उन्होंने कहा कई गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर सदन में चर्चा नहीं हो पा रही। उन्होंने बताया कि वे रात-रात भर जागकर तथ्यों के साथ तैयारी करते हैं, लेकिन सदन में उन विषयों को उठाने का अवसर ही नहीं मिलता।
अब तक विभाजित थी भूमिका, यह मुश्किल
उन्होंने कहा सरकार सदन में महत्वपूर्ण सवालों से बचने का प्रयास करती है, जिससे विपक्ष प्रभावी तरीके से घेर नहीं पाती। उन्होंने कहा, उनकी भूमिका विधायक और उप नेता के रूप विभाजित है, इस वजह से वह निजी जीवन और क्षेत्रीय दायित्वों के बीच संतुलन नहीं बना पा रहे हैं। पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल न हो पाना, करीबी लोगों के दुख-दर्द में साथ न दे पाना उन्हें भीतर से परेशान कर रहा था। जब लगा कि सदन में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे, तो पद छोड़ना अधिक उचित जान पड़ाा।
पद से तय नहीं होती विपक्ष की जिम्मेदारी
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने का मतलब यह नहीं है कि उनकी आवाज कमजोर पड़ जाएगी। उन्होंने कहा वह किसी पद के सहारे नहीं बोलते, बल्कि जनता और अपने परिवार से मिली ताकत के आधार पर सरकार को घेरते हैं। आगे भी वह इसी तरह से जन सरोकारों से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे और भ्रष्टाचार या अन्य मामलों पर खुलकर बोलेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी केवल पद से नहीं, बल्कि सक्रियता और साहस से तय होती है।
संगठन सर्वोपरि, जो कहेगा करेंगे
जब उनसे पूछा गया कि यदि पार्टी इस्तीफा स्वीकार नहीं करती तो क्या वे पद पर बने रहेंगे, तो उन्होंने संकेत दिया कि वे निर्णय नेतृत्व पर छोड़ चुके हैं। उनके लिए संगठन सर्वोपरि है। जो भी निर्देश मिलेगा, उसका पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी किसी और को यह जिम्मेदारी देना उचित समझे, तो वे उसका समर्थन करेंगे। अपने पुराने मामलों के फिर से खुलने को लेकर भी उन्होंने बेबाक प्रतिक्रिया की। उन्होंने कहा वे किसी भी तरह दबाव में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा वह संघर्ष से नहीं डरते। उन्होंने कहा पद छोड़ा है, राजनीतिक लड़ाई नहीं । वह राजनीतिक मोर्चे पर मुस्तैदी के साथ डटे रहेंगे।









