भोपाल। प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हलाली डैम क्षेत्र में पांच लुप्तप्राय गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त करेंगे। यह पहल केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि राज्य में गिद्ध संरक्षण को मजबूत करने की एक गंभीर और वैज्ञानिक कोशिश है।
जिन गिद्धों को छोड़ा जा रहा है, वे विशेष रूप से उपग्रह आधारित टेलीमेट्री उपकरणों से सुसज्जित हैं, ताकि उनकी गतिविधियों और प्रवास पर लगातार नजर रखी जा सके। इन पांच गिद्धों में चार भारतीय गिद्ध और एक सिनेरियस गिद्ध शामिल है।
हाल में गिद्धों की संख्या में आई बड़ी गिरावट
भारतीय गिद्ध कभी देशभर में बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन हाल के दिनों में इनकी संख्या में दवाओं के दुष्प्रभाव और पर्यावरणीय कारणों से भारी गिरावट आई है। ऐसे में इन प्रजातियों को सुरक्षित वातावरण में पुनर्स्थापित करना संरक्षण रणनीति का अहम हिस्सा है। इन पक्षियों को पहले भोपाल स्थित वन विहार नेशनल पार्क के गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में रखा गया, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण, अनुकूलन और व्यवहार का अवलोकन किया गया। पूरी तरह सक्षम पाए जाने के बाद ही इन्हें प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है।
शरीर पर जीपीएस-जीएसएम ट्रांसमीटर लगाए
इन गिद्धों के शरीर पर उच्च गुणवत्ता वाले जीपीएस-जीएसएम ट्रांसमीटर लगाए गए हैं। यह आधुनिक तकनीक वैज्ञानिकों को उनकी उड़ान की दिशा, ठहराव के स्थान, भोजन की तलाश और संभावित खतरों की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध कराएगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि मध्य भारत में कौन-से इलाके गिद्धों के लिए सुरक्षित हैं और किन क्षेत्रों में जोखिम अधिक है। इस तरह यह कदम केवल पांच पक्षियों की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक अध्ययन और दीर्घकालीन संरक्षण योजना का हिस्सा है।
प्रदेश में 3 दिवसीय गिद्ध गणना अभियान संपन्न
हाल ही में प्रदेश में तीन दिवसीय गिद्ध गणना अभियान भी संपन्न हुआ है। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि पिछली गणना की तुलना में इस बार गिद्धों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। आधिकारिक आंकड़े जल्द जारी किए जाएंगे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण उपायों का सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में गिद्धों की संख्या में और सुधार संभव है। गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वे मृत पशुओं के अवशेषों को साफ कर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं और कई संक्रामक बीमारियों के फैलाव को रोकने में भूमिका निभाते हैं।










